फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पुलिस की मरौली भगत से बंदी कर रहे थे मौज

विज्ञापन
विज्ञापन
आजमगढ़। लालच में अधिकारियों और कर्मचारियों ने बंदियों के सामने घुटने टेक दिए थे। इस चक्कर में पुलिस ने बंदियों को क्या-क्या सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं इसकी पोल खुलनी शुरू हो गई है। पिछले दिनों का रिकार्ड चेक करते समय एसपी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने पाया कि बीते दिसंबर माह से कोर्ट लॉकअप की जीडी में किसी भी बंदी की आमद दर्ज नहीं हुई है। ऐसे में ये पता लगा पाना मुश्किल है कि कौन-कौन से बंदियों की कब पेशी हुई, कब जेल में वापस गए। इस दौरान उन्होंने क्या-क्या किया। मामला पकड़ में आने पर एसपी ने सीओ सदर को जांच सौंपते हुए रिपोर्ट मांगी है। वर्तमान समय में जिला जेल में एक हजार से अधिक बंदी निरुद्ध हैं। प्रतिदिन करीब 100 से 150 बंदियों को अदालत की सुनवाई के दौरान पेश किया जाता है। बंदियों को जेल से सुरक्षित लाने और ले जाने के लिए पुलिस लाइन से 30 से अधिक दरोगा और सिपाहियों की ड्यूटी लगती है। सभी बंदियों को पुलिस वाहन से कोर्ट लॉकअप में लाकर बंद किया जाता है। यहीं से बारी-बारी बंदियों की संबंधित कोर्ट में पेशी होती है। नियमत: लॉकअप प्रभारी को जेल से आने वाले प्रत्येक बंदियों की जीडी में आमद दर्ज करनी होती है। लेकिन, बीते दिसंबर माह से लॉकअप की जीडी में किसी भी बंदी की आमद दर्ज नहीं है जबकि बंदियों की बराबर कोर्ट में पेशी हो रही है। 15 मार्च को जेल के भीतर से 32 मोबाइल बरामद हुए। इसे लेकर जेल में बवाल, मारपीट और हिंसक घटना हुई। साथ ही जेल की व्यवस्थाओं की भी पोल खुल गई। इसी क्रम में शुक्रवार को एसपी रिकार्ड चेक करने कोर्ट के लॉकअप पहुंचे तो ये फर्जीवाड़ा उजागर हुआ।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें