आजमगढ़। जेल में निरुद्घ विचाराधीन बंदी के परिजनों को तीन लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जायेगी।
गंभीरपुर थाना क्षेत्र का रहने वाला जलालुद्दीन उर्फ सलमानी पुत्र रियाजुद्दीन एनडीपीएस, धारा 307 और 25 आर्म्स एक्ट में निरूद्घ था। जेल में जनवरी 2014 में उसकी तबीयत खराब हुई। 15 जनवरी 2014 को उसकी मौत हो गई। बंदी की मौत के बाद परिजनों ने जेल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए मानवाधिकार आयोग में गुहार लगायी। जिस पर मानवाधिकार आयोग ने मृत बंदी के आश्रितों को 3 लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया। मानवाधिकार आयोग के निर्देश पर अनु सचिव उत्तर प्रदेश शासन डॉ. गिरीश चंद्र खरे ने महानिरीक्षक कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाओं को सहायता राशि उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। शासन से जारी हुए आदेश में शासन से दी जाने वाली सहायता राशि की वसूली तत्कालीन दोषी पाये गये जेल कर्मियों से वसूल कर राजकोष में जमा करने का भी निर्देश दिया गया है। जेल अधीक्षक (जिला/मंडल कारागार ) अनिल कुमार गौतम ने बताया कि शासन के आदेश की जानकारी है, बजट उपलब्ध होते ही विचाराधीन बंदी के परिजनों को सहायता राशि उपलब्ध करा दी जायेगी।
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