जिले में खरीदे जाने वाले ट्रैक्टर का विभाग में केवल कृषि कार्य के लिए रजिस्ट्रेशन कराया जा रहा है। जबकि उसका निजी व व्यावसायिक उपयोग हो रहा है। इस कार्य में लगे लोग सरकार को क्षति पहुंचाने के साथ ही पंजीयन के नियमों की खुलेआम अवहेलना कर रहे हैं। इससे विभाग को राजस्व का काफी नुकसान हो रहा है। जिले में 1500 से अधिक टैक्टर का रजिस्ट्रेशन कराया गया है। इनके रजिस्ट्रेशन में वाहन स्वामियों द्वारा केवल कृषि कार्य के लिए दर्शा कर इसका पंजीयन करा लिया गया है। जिले में एक भी ट्रैक्टर-ट्रॉली का न तो निजी उपयोग के लिए रजिस्ट्रेशन कराया गया है। और न ही उसका कॉमर्शियल उपयोग के लिए ही रजिस्ट्रेशन कराया गया है। ऐसे में जहां रजिस्ट्रेशन के नाम पर टैक्स की चोरी की गई। वहीं व्यावसायिक पंजीयन के बाद दिए जाने वाले टैक्स की भी चोरी की जा रही है। जबकि देखा जाए तो जिले में सैकड़ों ईंट-भट्ठों में से अधिकांश भट्ठा संचालकों के पास दो से पांच तक ट्रैक्टर-ट्रॉली मौजूद हैं। जिनका उपयोग ईंट ढुलाई के लिए हो रहा है। सैकड़ों ट्रैक्टर-ट्रॉलियां ऐसी भी हैं जिनके संचालकों द्वारा उनका उपयोग लकड़ी, बालू व मिट्टी सहित मौरंग गिट्टी आदि की ढु़लाई के लिए भाड़े पर किया जाता है। ऐसे में केवल कृषि कार्य के रजिस्ट्रेशन कराकर जहां वाहन स्वामियों द्वारा प्रति वर्ष करोड़ों रुपये का सरकार को राजस्व का चूना लगाया जा रहा है। वहीं उसका व्यवसायिक उपयोग कर रजिस्ट्रेशन की शर्तों की अवहेलना भी की जा रही है। सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी प्रशासन सतेंद्र कुमार यादव ने बताया कि अभियान चलाकर ऐसे ट्रैक्टर-ट्रॉलियों पर कार्रवाई की जा रही है। जो कृषि कार्य के लिए पंजीकृत उनका प्रयोग व्यवसायिक में करते मिला तो कार्रवाई की जाएगी।