आजमगढ़। देश की राजधानी दिल्ली में एक बेसमेंट में संचालित कोचिंग सेंटर में पानी भर जाने से तीन छात्रों की मौत के बाद भी आजमगढ़ जिला प्रशासन नहीं चेत रहा है। नतीजा जिले के हर गली-मोहलले में बिना रजिस्ट्रेशन के धड़ल्ले से कोचिंग सेंटर संचालित हो रहे हैं। विभाग इन पर रोक लगाने के लिए गंभीर नहीं है। पूरे जनपद में मात्र 39 कोचिंग सेंटर का ही डीआईओएस कार्यालय में पंजीकरण है। जबकि शहर से लेकर गांव तक 200 से अधिक कोचिंग सेंटर चल रहे हैं।
कोचिंग संचालन के लिए शासन ने मानक तय किए हुए हैं। इसमें उनका पंजीकरण भी जरूरी है। इसके अलावा अग्निशमन विभाग से एनओसी, कोचिंग सेंटर पर अग्निशमन यंत्र, कुशल शिक्षक, बैठने की उचित व्यवस्था, शौचालय, पीने का पानी, बिजली, पंखा, लाइट, पार्किंग स्थल, फीस निर्धारण और उचित साफ-सफाई मानकों में शामिल है। जिले में संचालित कोचिंग सेंटर की जांच के लिए न तो अग्निशमन विभाग के पास फुर्सत है और न ही डीआईओएस के पास। लिहाजा शहर से लेकर गांव तक हर तिराहे और चाराहों व बाजारों में कोचिंग सेंटर चल हैं। लेकिन पूरे जनपद में मात्र 39 कोचिंग सेंटर का ही डीआईओएस कार्यालय में पंजीकरण है। बाकी अवैध रूप से चल रहे हैं।
अभियान चलाकर कोचिंग सेंटर की जांच की जाएगी। जो बिना पंजीकरण होगा, उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। विभाग में 39 कोचिंग सेंटर का पंजीकरण है। विरेंद्र प्रताप सिंह, प्रभारी डीआईओएस।