परिपदीय विद्यालय की छात्र-छात्राएं अब आपदा प्रबंधन के गुर सीखेंगे। किसी प्रकार की आपदा आने पर छात्र एक-दूसरे की मदद करेंगे। साथ ही अन्य लोगों को भी जागरूक करेंगे। इसके लिए स्कूलों ने चयन कर प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरा कराने की तैयारी कर दी है।
मुख्यमंत्री सुरक्षा कार्यक्रम के तहत प्रदेश स्तर पर एजेंसी का चयन किया जाएगा। यह एजेंसी सभी विद्यालयों में इस कार्यक्रम को लागू कराएगी। पहले चरण में बेसिक शिक्षा परिषद के 35 विद्यालयों के छात्र-छात्राओं को आपदा प्रबंधन के तौर तरीके बताए जाएंगे। चयनित एजेंसी जिले के प्रशिक्षकों को तीन दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण देगी। प्रशिक्षित अध्यापक चयनित किए गए विद्यार्थियों को प्रशिक्षित करेंगे। प्रत्येक विद्यालय की आपदा प्रबंधन योजना तैयार की जाएगी। इसके अलावा बेसिक सेफ्टी ऑडिट की जाएगी। इसका उद्देश्य विद्यालय को आपदाओं को प्रति सुदृढ़ बनाने के लिए उपायों का सुझाव देना है। इसके बाद प्रत्येक विद्यालय में एक दिवसीय पूर्वाभ्यास कराया जाएगा। एप के माध्यम से विभिन्न लघु फिल्में बनाकर जागरूकता का प्रचार-प्रसार किया जाएगा। प्रत्येक स्कूल के प्रधानाध्यापक ऑफिस में अग्निशमन विभाग व पुलिस कंट्रोल रूम नंबर उपलब्ध कराएंगे। विद्यालय में अन्य सभी नंबर उपलब्ध रहेंगे।
इन पर रहेगा फोकस
आपदा से बचाव के लिए प्रशिक्षण में जलवायु संबंधी स्रोत से बड़े पैमाने पर होने वाली प्राकृतिक आपदाएं, मानव निर्मित संकट, महामारी, हिंसा, छोटे पैमाने पर होने वाले अग्निकांड को लेकर सचेत किया जाएगा। यातायात संबंधी जानकारी, पर्यावरण के खतरे एवं आपातकालीन घटनाओं के बारे में जानकारी दी जाएगी। इससे बचाव एवं सुरक्षा के तौर तरीकों के बारे में बारीकी से समझाया जाएगा।
विद्यालय में सुरक्षा में सहयोग के लिए केंद्रीय भूमिका में शिक्षकों के अतिरिक्त सभी शिक्षकों को इस संबंध में संवेदनशील बनाया जाएगा। सभी प्रधानाध्यापक अपने विद्यालयों में आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण कराएं। इससे आने वाले समय में विद्यालय का वातावरण अधिक सुरक्षित होगा। - समीर, बीएसए आजमगढ़।