अब आंगनबाड़ी केंद्रों पर पंजीकृत बच्चों का भी आधार आधारित एक ही यूनिक आईडी होगी। इससे जहां योजनाओं और सुविधाओं का लाभ देने में आसानी होगी, वहीं उनका डाटा भी एक ही क्लिक पर उपलब्ध होगा। इसके बाद छात्रों को स्कूल बदलने, कॉलेज में प्रवेश लेने और नौकरी आदि के लिए कई जगह प्रपत्र प्रमाणित कराने से छुटकारा मिल जाएगा। जिले में कुल 5588 आंगनबाड़ी केंद्र है। इनमें 630 केंद्र विभाग के भवन में संचालित हो रहा है। वहीं करीब 4720 परिषदीय व 238 पंचायत भवन एवं सामुदायिक भवन में संचालित हो रहे हैं। उक्त विद्यालयों में छह माह से तीन वर्ष तक के 275666 बच्चे पंजीकृत है। वहीं तीन से छह वर्ष तक के 248006 बच्चे पंजीकृत है। इनमें 6 माह से तीन वर्ष के 186610 और तीन माह से छह वर्ष तक के बच्चों को लाभ मिल रहा है। नई योजना के तहत बच्चों की आईडी शासन के केंद्रीयकृत सर्वर से जोड़ी जाएगी। इससे सरकार के पास भी सही और समग्र प्रमाणित डाटा उपलब्ध होगा, वहीं विद्यार्थियों के लिए भी आसानी होगी कि उनकी पूरी शैक्षिक जानकारी एक ही जगह पर उपलब्ध होगी। डीपीओ मनोज मौर्या ने बताया कि बच्चों की यूनिवर्सल आईडी बननी है। जल्द ही प्रक्रिया शुरु हो जाएगी लेकिन अभी तक साफ्टवेयर नहीं मिला है। इससे विभिन्न चीजों में दोहराव को रोका जा सकेगा। साफ्टवेयर आने का इंतजार किया जा रहा है। उसके बाद ही कुछ हो सकेगा।