कस्बा में बुधवार को शहीदाने करबला की याद में चेहल्लुम का जुलूस अकीदत के साथ निकाला गया। इसके पूर्व मरहूम सैय्यद इब्ने हसन के चौक पर मजलिस आयोजित की गई।
मजलिस में मौलाना सैयद कमर अब्बास प्रतापगढ़ ने कहा कि पैगंबरे इस्लाम ने जिस पाक और सच्चे धर्म को दुनिया में फैलाया था। उसे ही बचाने के लिए उनके नवासे हजरत इमाम हुसैन और उनके 72 साथी कर्बला में शहीद हो गए थे।
उधर जुलूस कमर मियां के चौक पहुंचा तो जियारत के लिए अजादार उमड़ पड़े। वहां से जुलूस पुरानी मछली मार्केट, सिनेमा रोड, मुंडियार मार्ग होते हुए करबला पहुंचा, जहां ताजिया दफन किया गया। इस दौरान या अली मौला, हैदर मौला की सदाएं गूंजती रहीं। कई स्थानों पर अंजुमन मसूमिया फूलपुर, अंजुमन फरोजे अजा चमावा, अंजुमन लश्करे हुसैनी बहाउद्दीनपुर ने गम भरा नौहा पेश किया। जुलूस में अलम, दुलदुल और इमाम हुसैन का ताबूत शामिल रहा। जिस पर लोगो ने फूल माला चढ़ाकर खिराज-ए-अकीदत पेश की। जुलूस के आगे अंजुमन मसुमिया अखाड़ा के लोग करतब दिखाते चल रहे रहे थे।