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Azamgarh News: आजमगढ़ बस स्टेशन का नाम अब नायब सूबेदार सौदागर सिंह

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शहीद सौदागर सिंह
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सगड़ी। आजमगढ़ बस स्टेशन का नाम उत्तर प्रदेश सरकार ने बदल दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर बस स्टेशन का नाम अब नायब सूबेदार सौदागर सिंह के नाम पर रख दिया गया है। इसके लिए अमर बलिदानी वीर सौदागर सिंह की पौत्र वधू अंजना सिंह ने खुशी जाहिर की है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार जताया है। आरएम मनोज वाजपेयी ने बताया कि बस स्टेशन का नाम बदलने का आदेशपत्र आ गया है। जल्द ही इसकी प्रक्रिया कराई जाएगी। सगड़ी तहसील क्षेत्र के पूनापार बड़ागांव निवासी अमर शहीद वीर सौदागर सिंह ने 1962 में चीन से हुए युद्ध में 12 चीनी सैनिकों को मारकर उनसे छीनी एसएलआर को लेकर अपने कैंप में पहुंच गए थे। भारत-चीन की लड़ाई में लड़ने वाले प्रथम वीर चक्र विजेता सौदागर सिंह पूनापार बड़ागांव के महातम सिंह और मां बेइला देवी के मझले पुत्र थे। वर्ष 1948 में फतेहपुर में राजपूत रेजीमेंट में भर्ती हुए थे। राणा प्रताप की पावन भूमि स्थित चित्तौड़ में सैन्य शिक्षा ग्रहण के बाद 1958 में लांस नायक बन गए और 1960 में उन्नति करते हुए हवलदार हो गए। इसी दौरान वर्ष 1962 में चीन ने भारत पर एकाएक आक्रमण कर दिया था। सौदागर सिंह राजपूत रेजीमेंट की एक फौजी टुकड़ी के साथ लद्दाख सीमा पर भेज दिए गए थे। वहां अपनी टुकड़ी के साथ चीनी सैनिकों से लोहा लेते हुए इनकी राइफल जाम हो गई। इन्होंने खुद को चीनी सेना से घिरा देख खुद को पहाड़ी की ओट में छिपाया। उसी समय वहां से गुजर रहे 12 चीनी सैनिकों को अपनी राइफल के चाकू से गोदकर मार डाला था। इसके बाद चीनी सैनिकों के एसएलआर को कंधे पर लादकर 10 दिन का सफर तय कर अपने ऑफिस के पास पहुंचे थे। उस समय भारत के सैनिकों के पास अत्याधुनिक एसएलआर रायफल्स नहीं थी। खून से लथपथ सौदागर सिंह को एकाएक सामने देखकर कमांडर भौचक्क रह गए। सौदागर सिंह की वीरता से प्रसन्न होकर तत्कालीन राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्ण ने 1962 में उन्हें वीर चक्र से सम्मानित किया था। भारत-पाकिस्तान के साथ हुए 1965 के युद्ध में सौदागर सिंह पाकिस्तानी सैनिकों से लड़ते हुए शहीद हो गए थे।
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