आजमगढ़। जिला जज सर्वेश कुमार एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव राजीव शुक्ला के नेतृत्व में जेल का निरीक्षण किया गया। साथ ही विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। जिसमें बंदियों को उनके विधिक अधिकारों की विधिवत जानकारी दी गई। बंदियों को संबोधित करते हुए अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम प्रज्ञा सिंह ने कहा कि कोई भी कैदी अधिवक्ता के अभाव में जेल में निरुद्ध नहीं रहेगा। ऐसे कैदी जिनके पास स्वयं के अधिवक्ता करने की क्षमता नहीं है। उन्हें जिला विधित सेवा प्राधिकरण की तरफ से अधिवक्ता नियुक्त कराया जाएगा। उनकी पैरवी कराई जाएगी। प्रज्ञा सिंह ने कहा कि जिन कैदियों की जमानत हो चुकी है और धनाभाव में उनके पास जमानतदार उपलब्ध नहीं है, ऐसे कैदियों को हाईकोर्ट के निर्देशानुसार जल्द ही रिहा कराया जाएगा। ऐसे कैदी जो अधिरोपित सजा में अधिकतम अवधि के आधी अवधि तक जेल में निरुद्ध रहे हैं। उन्हें भी रिहा किए जाने का प्रयास किया जाएगा। जिला कारागार में निरुद्ध महिला बंदियों के साथ रह रहे उनके बच्चों के खानपान, स्वास्थ्य आदि की भी जानकारी ली गई। एडीजे आठ शेष बहादुर निषाद ने कैदियों को उनके अधिकार के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कैदी अपने आप को तब तक अपराधी न मानें, जब तक उन्हें कोर्ट सजा न दें। एडीजे (एफटीसी) प्रथम अनिल कुमार वर्मा ने कहा कि पाप से घृणा करो, पापी से नहीं। उन्होंने बंदियों से कहा कि आप लोग अपने अंदर स्वयं के परिष्करण से अपने जीवन का उत्थान कर सकते हैं। एडीजे सात जितेंद्र यादव ने कहा कि बंदी अनुशासन में रहकर अपने जीवन में बहुत कुछ सीख सकते हैं। कार्यक्रम के अंत में लीड बैंक यूबीआई के प्रतिनिधियों द्वारा बंदियों के प्रशिक्षण की रुप रेखा प्रस्तुत की गई। इस अवसर पर वरिष्ठ जेल अधीक्षक राधे कृष्ण मिश्रा सहित अन्य लोग मौजूद रहे।