आंगनबाड़ी व सहायिका की भर्ती के लिए नया शासनादेश जारी किया गया है। इसमें आंगनबाड़ी सहायिका की शैक्षिक योग्यता अब इंटर मीडिएट या उसके समकक्ष और न्यूनतम आयु 18 तथा अधिकतम 35 वर्ष होगी। 62 की आयु होते ही उनकी मानदेय आधारित सेवाएं स्वत: समाप्त हो जाएगी। अनामिका सिंह सचिव उत्तर प्रदेश शासन की तरफ से सभी जिलाधिकारियों को जारी आदेश में कहा गया है कि समन्वित बाल विकास परियोजना के तहत आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका के संबंध में चयन प्रक्रिया का पुनर्निर्धारण किया गया है। जिले में जितनी आंगनबाड़ी की भर्ती की जानी है, उसमें 50 प्रतिशत भर्ती आंगनबाड़ी पद पर सहायिका से की जाएगी। शर्त यह होगी कि जिस ग्राम सभा में पद रिक्त है उस ग्राम सभा की सहायिका सभी शर्त पूरी करती हो। उसकी शैक्षिक योग्यता इंटर तथा आयु 35 से अधिक नहीं होनी चाहिए। यदि यह शर्त वह पूरी करती हो तो उसका चयन किया जाएगा। चयन के समय विगत पांच वर्ष में नियमित रूप से मानदेय भुगतान कार्य व्यवहार सेवा में व्यवधान को संज्ञान में लिया जाएगा। यदि कार्य में लापरवाही मिली, तीन महीने तक अनुपस्थित रही हैं तो उनका चयन नहीं किया जाएगा। जारी शासनादेश में इस बात का भी उल्लेख किया गया है कि एक आंगनबाड़ी केंद्र पर एक ही परिवार की दो महिलाओं की नियुक्ति आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका के पद पर नहीं की जाएगी। यदि कोई आंगनबाड़ी सहायिका ग्रामसभा सदस्य, ग्रामप्रधान, क्षेत्रपंचायत सदस्य, ब्लाक प्रमुख, जिला पंचायत सदस्य एवं ब्लाक प्रमुख पार्षद या अध्यक्ष चुनी जाती है तो उसकी मानदेय आधारित सेवा शपथ लेते ही समाप्त हो जाएगी। इतना ही नहीं यदि कोई आंगनबाड़ी सहायिका यदि चयन के बाद अपना मूल निवास छोड़ देती है या शादी होने के बाद अन्य गांव में निवास करने लगती है तो बाल विकास परियोजना अधिकारी से आख्या लेकर उसकी सेवा समाप्त कर दी जाएगी। जिला कार्यक्रम अधिकारी मनोज मौर्या ने कहा कि आंगनबाड़ी और सहायिकाओं की नियुक्ति के लिए शासन की ओर से नया शासनादेश जारी किया गया है। इसको पूरा करने वाली महिला ही आंगनबाड़ी या सहायिका बन सकती है। पूर्व में नियुक्ति की जो प्रक्रिया चल रही थी उसे निरस्त कर दिया गया है। अब सब नए सिरे से होगा।