निजामाबाद। कस्बे के हुसैनाबाद मोहल्ले के ब्लैक पॉटरी के हस्तशिल्प कलाकार पहले कोरोना के कारण बेहाल थे। जब सबकुछ सामान्य हुआ तो वह महंगाई की मार झेलने को विवश है। हस्त् शिल्पकारी में प्रयुक्त होने वाली मिट्टी के साथ ही इसमें प्रयुक्त होने वाले कच्चे माल के दाम भी काफी बढ़ गए हैं। जिसके कारण हस्त शिल्पकार काफी परेशान हैं। ब्लैक पॉटरी मिट्टी के बर्तन बनाने में कच्चे माल के रूप में जो मिट्टी निजामाबाद में हस्तशिल्प कलाकारों को 300 ट्राली मिलती थी अब वह मिट्टी 2500 रुपए ट्राली मिल रही है। ब्लैक पॉटरी मिट्टी के बर्तन बनाने में जिन चीजों का प्रयोग किया जाता है। जिसमें पारा 12000 रुपये किलो था उसका दाम इस महंगाई में 18000 रुपये किलो हो गया है। रांगा 4000 रुपये किलो से बढ़कर 8000 रुपये किलो हो गया है। जो कारीगर 50 रुपये घंटे पर काम करते थे वह कारीगर अब डेढ़ सौ रुपए घंटे पर काम कर रहे हैं। 5 रुपये प्रति पीस के हिसाब से सामान बनाने वाले कारीगर 10 से 15 रुपये प्रति पीस मिट्टी के बर्तन को बना रहे हैं। सोहित कुमार प्रजापति ने बताया कि महंगाई की मार से निजामाबाद के हस्तशिल्प कलाकारों की कमर टूटती जा रही हैं। महंगाई इतनी ज्यादा हो गई है कि हम लोगों को कलाकृति बनाने में और बेचने में दोनों समय परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बैजनाथ प्रजापति ने बताया कि सामान के दाम दुगने हो गए हैं। जो कच्चे माल हम लोग जिस मूल्य में खरीदते थे आज उसका दुगना मूल्य हम लोगों को चुकाना पड़ रहा है। व्यापार में बिक्री न के बराबर होती जा रही है। शिवरतन प्रजापति हस्तशिल्प कलाकार ने बताया कि पेट्रोल डीजल के दाम दिन प्रति दिन बढ़ते जा रहे हैं जिससे महंगाई की मार कलाकारों की जेब पर पड़ रही है आम आदमी का जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया है।