आजमगढ़। जिले में वर्ष 2008 में आजमगढ़ विकास प्राधिकरण का गठन किया गया। इसका उद्देश्य था लोगों को बुनियादी सुविधाएं दिलाना, इसके अलावा उनके लिए आवास की व्यवस्था करना। लेकिन वह अपने उद्देश्य को पूरा कर पाने में अभी विफल लग रहा है। आजमगढ़ विकास प्राधिकरण अब तक विकास के नाम पर सिर्फ स्वागत गेट लगावा सका है और सड़कों के किनारे पेड़ों को लगा सका है। एडीए अब तक न तो कोई कालोनी बसा सका है और ना ही आमजन की सुविधाओं का विस्तार करा सका हैै। प्राधिकरण द्वारा अब तक अवैध निर्माणों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है, बल्कि प्राधिकरण क्षेत्र में हजारों अवैध भवनों का निर्माण हो चुका है। लेकिन अब तक प्रधिकरण ने सिर्फ 55 लोगों के भवनों को सील किया है। 12 अवैध निर्माणों को ध्वस्त किया है तो वहीं 250 लोगों को ध्वस्तीकरण का नोटिस दिया गया है। वहीं ध्वस्तीकरण का नोटिस मिलने पर करीब 90 लोग कमिश्नर के यहां अपील कर चुके हैं।
एडीए द्वारा शहर के समुचित विकास का खाका खींच जाता है लेकिन उसके कर्मचारियों ने उसे अपनी अवैध कमाई का जरिया बना लिया है। जिसका परिणाम है कि जनपद में प्रतिबंधित क्षेत्र में धड़ल्ले से अवैध निर्माण जारी है। इतना ही नहीं मानचित्र स्वीकृत कराने के लिए दो साल पहले तक लोगों को कार्यालय का चक्कर काटना पड़ता था। जिस पर लगाम लगाने के लिए 2020 से शासन के निर्देश जनपद में आनलाइन मानचित्र स्वीकृत कराने का निर्देश दिया गया। जिसके तहत अब तक 118 मानचित्र स्वीकृत किए गए हैं। जबकि इसके सापेक्ष 265 लोगों ने ऑनलाइन मानचित्र स्वीकृत करने के लिए आवेदन किया था। इनमें से 67 लोगों के आवेदन पर विभाग द्वारा टिप्पणी लगाकर लौटा दिया गया और 70 लोगों के आवेदन को कमियों के कारण रद्द किया गया है जबकि सात आवेदन अभी तक लंबित हैं।
इस मामले में एडीएम सचिव बैजनाथ ने बताया कि हमारी ओर से लगातार अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। आगे भी यह कार्रवाई जारी रहेगी। बीच कुछ दिनों के लिए इसमें कुछ कमी हुई थी लेकिन अब तीव्र गति से इस पर कार्य किया जाएगी। इसके साथ ही विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी लगाम लगाने का हमारी ओर से प्रयास किया जा रहा है। लेकिन सिर्फ लोग कहते हैं कोई शिकायत सबूत के साथ नहीं करता अगर करें तो हम उनके खिलाफ भी कार्रवाई करें।
सील और ध्वस्तीकरण का नोटिस, फिर भी गतिविधि जारी
आजमगढ़। अवैध निर्माणों को कराने में विभागीय अधिकारियों की संलिप्तता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिस ग्रीन बेल्ट एरिया में निर्माण प्रतिबंधित है उस क्षेत्र में पूर्व में कई भवनों का निर्माण किया गया। जिनके मालिकों को एडीए की ओर से नोटिस जारी किया गया। उन्हें सील किया गया और ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया गया लेकिन आज वह भवन बनकर तैयार हैं और उनमें व्यावसायिक गतिविधि भी शुरू हो चुकी है।