आजमगढ़। पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे को सरकार तो पूर्वी यूपी की लाइफ लाइन बता ही रहे हैं, विभागीय अधिकारियों की राय भी इससे इतर नहीं है। यूपीडा के अधिकारियों का दावा है कि जिस तरीके से पश्चिमी यूपी में गंगनहर और अन्य नहरों को जाल से खेती का तरीका ही बदल गया था, उसी तर्ज पर पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे बनने के बाद पूर्वी यूपी में भी औद्योगित क्रांति आएगी। ये कई महानगरों को जोड़ेगा। इसके किनारे औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए जाएंगे। जो पूर्वांचल की बेरोजगारी की समस्या को दूर करने में मदद करेगा। सामरिक दृष्टि से भी ये महत्वपूर्ण साबित होगा। सुल्तानपुर के पास बनने वाली एयर स्ट्रिप पर लड़ाकू विमान सहित बड़े विमान उतारे जाएंगे। यूपीडा के अपर मुख्य कार्यपालक रविंद्र गोडबोले ने बताया कि करीब 350 किमी लंबा ये एक्सप्रेस-वे लखनऊ के चांद सराय से शुरू होगा और यूपी-बिहार की सीमा से 18 किमी पहले गाजीपुर के हैदरिया में एनएच-31 में मिलेगा। एक्सप्रेस-वे लखनऊ, बाराबंकी, अमेठी, फैजाबाद, सुल्तानपुर, अंबेडकरनगर, आजमगढ़ मऊ होते हुए गाजीपुर तक जाएगा। एक्सप्रेस-वे के राइट आफ-वे की चौड़ाई 120 मीटर होगी। जनपद में इसकी लंबाई लगभघ 99 किमी है। ये फूलपुर, निजामाबाद, सगड़ी और सदर तहसील के 112 गांवों से होकर गुजरेगा। सिक्स लेन के इस एक्सप्रेस-वे में कई ग्रीन कारीडोर, इंडस्ट्रियल कारीडोर भी बनाए जाएंगे। अधिकारियों का मानना है कि इस एक्सप्रेस-वे के बनने के बाद पूर्वांचल के विकास को नई दिशा मिलेगी। खासतौर पर कृषि और औद्योगिक क्षेत्र से जुड़ने के बाद रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। उन्होंने बताया कि एक्सप्रेस-वे पर लगभग सात रेलवे ओवरब्रिज, सात बड़े पुल, 112 छोटे पुल, सात टोल प्लाजा, चार रैंप प्लाजा, 220 अंडर पास और 496 पुलियों का निर्माण किया जाएगा। आपातकालीन स्थिति में लडाकू और बड़े विमानों की लैंडिंग के लिए जनपद सुल्तानपुर के जयसिंहपुर तहसील में एयर स्ट्रिप का निर्माण कराया जाएगा। एक्सप्रेस-वे को बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे, गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस-वे, प्रयागराज लिंग एक्सप्रेस-वे से जोड़ा जाएगा।