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Azamgarh News: 85 लाख खर्च फिर भी ‘संविधान शिल्पी’ के नाम का पुस्तकालय भवन अधूरा

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आजमगढ़। शहर के आराजीबाग में 85 लाख रुपये से संविधान शिल्पी के नाम से पुस्तकालय का निर्माण तो हुआ लेकिन 25 वर्ष बाद भी अधूरा ही है। जिस उद्देश्य से डा. आंबेडकर पुस्तकालय भवन के निर्माण की परियोजना स्वीकृत हुई, उसे जिला समाज कल्याण विभाग भी भूल गया। 24 वर्ष बाद वर्ष 2021 में विभाग को इसकी याद आई तो 1.07 करोड़ रुपये की पुनरीक्षित आगणन तैयार कर निदेशालय को भेजा। तब लोगों को आस जगी कि अब अधूरे पड़े पुस्तकालय के दिन शायद बहुर जाएंगे लेकिन ऐसा अभी तक नहीं हुआ।
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बताते हैं कि छह सितंबर 1997 को शासन ने शहर के आराजीबाग में डा. भीमराव आंबेडकर के नाम से पुस्तकालय भवन बनाने की स्वीकृति दी थी। उस समय स्वीकृति लागत 85 लाख रुपये रखी गई थी। पुस्तकालय का निर्माण तो हुआ लेकिन 25 वर्ष बाद भी अधूरा ही रह गया। इतना ही नहीं जो बना था वह भी जर्जर हो गया है। भवन के बाहर बड़ी-बड़ी झाड़ियां उग गई थी। शासन ने जिला प्रशासन से इसकी जांच कर रिपोर्ट मांगी थी। लोक निर्माण विभाग की टीम ने जांच आख्या में बताया है कि यदि समय रहते कार्य पूरा नहीं कराया तो सरकारी क्षति से इंकार नहीं किया जा सकता। क्योंकि देखरेख के अभाव में भवन की उम्र लगभग पूरी हो गई है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि धनाभाव में 19 वर्ष (2002) से निर्माण बंद है। करीब 69 फीसदी कार्य हुआ है। जिला प्रशासन के निर्देश पर जिला समाज कल्याण अधिकारी द्वारा पुनरीक्षित आगणन निदेशालय को भेज दिया गया है।
डीएम की संस्तुति पर विभाग द्वारा डा. आंबेडकर पुस्तकालय के निर्माण के लिए पुन: नया आगणन रिपोर्ट तैयार कर निदेशालय को भेजा गया था। धनराशि आवंटित नहीं हुई है। इसके कारण कार्य अभी भी अधूरा है। धनराशि आवंटित होते ही अधूरा कार्य पूरा कराया जाएगा। - मोती लाल, जिला समाज कल्याण अधिकारी।
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