आजमगढ़। सौहार्द के पर्व होली में भद्दगी न हो बल्कि ऐसी होली खेलें कि सामने वाले का मन भी लाल हो जाए। साथ ही उसे कोई मलाल न हो। गिले-शिकवे भूलकर एक-दूसरे को रंग लगाएं। होली प्रेम का त्योहार है इसमें किसी प्रकार की कलुषता न पैदा होने दें। नगर के चिकित्सकों, व्यापारियों और समाजसेवियों से यह अपील की है। सामाजिक कार्यकर्ता एसके सत्येन का कहना है कि होली पर्व मलाल और गिले शिकवे भुलाकर एक दूसरे से गले लगाने का है। ऐसे में इसको इसी रूप में ही मनाया जाए। ताकि किसी के अंदर कोई मलाल न रहे। न्यूरो सर्जन डा. अनूप सिंह यादव का कहना है कि होली में रंग से ही लोगों को लाल करें। ऐसी कोई होली नहीं होनी चाहिए जिससे किसी के शरीर को नुकसान पहुंचे, साथ ही वह अस्पताल पहुंचे। समझदारी और सर्तकता से होली का पर्व मनाने की जरूरत है। व्यापारी ओम अग्रवाल का कहना है कि होली भले ही हुड़दंग का त्योहार है, लेकिन यह हुड़दंग उल्लास का होना चाहिए न कि समाज के विखंडन का। उन्होंने कहा कि ऐसे किसी रंग का प्रयोग नहीं करना चाहिए, जिससे किसी के स्वास्थ्य को हानि पहुंचे। जिला चिकित्सालय के वरिष्ठ सर्जन डा. राजनाथ का कहना है कि इस होली पर ऐसे रंगों का प्रयोग करें जो किसी को नुकसान न पहुंचाएं। जहां तक हो सके प्राकृतिक रंगों का प्रयोग करें और सिंथेटिक रंगों से बचें। किसी की आंख में रंग न जाए इसका विशेष ध्यान रखें।