आजमगढ़। शासन की ओर से बाढ़ प्रभावित जिलों के प्रत्येक तहसील में एक-एक मॉडल कैंप स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। शासन की ओर से सर्वे कराकर पांच उत्कृष्ट राहत कैंपों को जिलाधिकारी सम्मानित करेंगे। प्रदेश के कई जनपदों को प्रतिवर्ष बाढ़ की समस्या का सामना करना पड़ता है। ऐसे में बहुत से लोगों को अपने पुश्तैनी मकान को छोड़कर दूसरी जगह पर नया ठिकाना बनाना पड़ता है। इन लोगों को राहत देने के लिए राहत कैंप लगाए जाते हैं। प्रशासन की ओर से उनके रहने और खाने की व्यवस्था की जाती है। लेकिन इस बार प्रदेश सरकार के सचिव एवं राहत आयुक्त ने सभी जनपदों को पत्र जारी कर बाढ़ प्रभावित जनपदों की प्रत्येक तहसीलों में एक-एक मॉडल राहत कैंप स्थापित करने का निर्देश दिया है। इन्हें बड़े और आवागमन के लिए सुगम स्थल पर बनाना होगा साथ ही यहां दो बार स्वच्छ एवं पौष्टिक भोजन की व्यवस्था होगी। स्तनपान कराने वाली महिलाओं को दूध, फल, पौष्टिक आहार आदि उपलब्ध कराया जाएगा। इन मॉडल रात कैंपों में खाने के लिए एक हॉल या वाटरप्रूफ शामियाना, बच्चों के लिए शिक्षक और खिलौनों की व्यवस्था होगी। इन कैंपों में नोडल अधिकारी के रूप में तहसीलदार या नायब तहसीलदार की ड्यूूटी रहेगी साथ ही कैंप की सुरक्षा के लिए सब इस्पेक्टर रैंक के अधिकारी के साथ महिला कांस्टेबल, पीआरडी या होमगार्ड की ड्यूटी लगाई जाएगी।