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मानव कल्याण और परोपकार संत का मूल उदेश्य

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बिंद्राबाजार। मानव कल्याण और परोपकार संत का सबसे मूल उद्देश्य है। संत अपने को तपन में रहकर दूसरों को शीतलता प्रदान करता है। ये बातें अखिल भारतीय संस्कृति रामेश्वरम मत पंथ के आचार्य सरजू दास ने मोहम्मदपुर के ग्राम मोहिद्दीनपुर स्थित रविदास मंदिर में कहीं। उन्होंने कहा कि संत बड़ा परमार्थी होता है। वह दूसरों के उपकार के लिए ही पैदा हुआ है। अपने चाल, चलन, व्यवहार और रहन-सहन को इस प्रकार बनाना चाहिए कि दूसरे लोग देखकर उनके जैसा बनने की कोशिश करें। मछली, मांस, मदिरा और नशीले पदार्थों से दूर रहकर काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार का त्याग करें। इस मौके पर बलवान दास, भोला दास, मऊ से गनपति दास, बाबा करन, शंकर प्रसाद, शिवशंकर लाल, कमरू राम पुजारी आदि थे।
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