आजमगढ़। जीएसटी के स्थापना दिवस पर द टैक्स बार एसोसिएशन के सदस्यों की बैठक संघ अध्यक्ष मो.इरफान की अध्यक्षता में वाणिज्य कर कार्यालय परिसर में हुई। वक्ताओं ने कहा कि जीएसटी ऐसा कर हैं जो टैक्स चोरी पर रोक, वस्तु के खपत पर कर में कमी तथा व्यापार व्यापारी की सहजता व जनता के राहत के लिए लाया गया था। लेकिन मरियल नेटवर्क, पांच प्रकार के करों की दर, उस पर सेस कानून की उलझाऊ व्यवस्था और अधिकारियों की निरकुंशता ने कारोबारी सहजता को खत्म कर दिया है। छोटे दुकानदारों और व्यापारी जीएसटी की चक्की में पिस रहे हैं। एसोसिएशन के प्रान्तीय अध्यक्ष अरविन्द गुप्ता ने कहा कि सरकार अभी भी कारोबारियों पर विश्वास नहीं कर रही है। रिटर्न की अधिक संख्या विधान की जटिलता कारोबारियों पर अविश्वास का परिचायक हैं। विभिन्न राज्यों में पंजीयन माल के परिचालन में रूकावट से कारोबार प्रभावित हो रहा है। इसका सरलीकरण आवश्यक हैं। लेट फीस के विधान से एक ओर जहां सरकार मालामाल हुई वहीं कारोबारी बेहाल हो गए हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता अवधेश चन्द श्रीवास्तव ने कहा कि इस कानून से 17 प्रकार के विभिन्न करो से जनता को राहत दिखाने का वादा केवल वादा ही रह गया। वक्ताओं ने सुझाव दिया कि प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए रिटर्न फाइलिंग का सरलीकरण, अच्छे और सरल नेटवर्क माल का निर्बाध परिचालन, सचल दल की कार्य प्रणाली से राहत देकर सुविधा दी जा सकती हैं। संचालन प्रभात बरनवाल ने किया। बैठक में वरिष्ठ सत्यप्रकाश गुप्ता, अशोक सिंह, सतीशचन्द्र गुप्ता, महेन्द्र यादव, संजय सिंह, उमेश श्रीवास्तव , एखलाक अहमद, अनवर जमाल, विपिन गुप्ता, सन्तोष वर्मा इत्यादि उपस्थित रहे।