आजमगढ़। वाराणसी लोकसभा सीट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ इस बार जीवित मृतक भी ताल ठोकेंगे। जीवित मृतकों के संगठन मृतक संघ के बैनर तले एक मृतक प्रधानमंत्री के खिलाफ चुनाव लड़ेगा। इसकी तलाश कर ली गई है। यह घोषणा मृतक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष लाल बिहारी मृतक ने शुक्रवार को राजघाट पर आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान किया। उन्होंने कहा कि सरकारी भ्रष्टाचार का शिकार होकर जीवित रहते हुए भी सरकारी रिकार्ड में मृत घोषित किए गए लोगों की संख्या पूरे देश में 50 हजार से अधिक है। कई लोग संघर्षों के बल पर जीवित भी घोषित किए जा चुके है, लेकिन आज भी काफी संख्या में ऐसे लोग खुद को जिंदा साबित करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुझे खुद सरकारी रिकार्डों में मृत घोषित कर दिया गया था और 18 वर्षों के संघर्ष के बाद आज पुन: जीवित हो सका हूं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सत्ता संभालने के बाद देश से भ्रष्टाचार के खात्मे का वादा किया था लेकिन वह अब तक अपना वादा पूरा नहीं कर सके। इसी भ्रष्टाचार के चलते हजारों की संख्या में जीवित व्यक्ति सरकारी रिकार्डों में मृत घोषित होकर परेशान हाल है। वर्ष 2000 में उच्च न्यायालय इलाहाबाद के आदेश पर यूपी में एक हजार से अधिक लोगों ने जीवित मृतकों को सरकारी रिकार्ड में जीवित घोषित कर दिया गया लेकिन उनमें से कई आज भी अपने जमीन, मकान आदि पर कब्जे को लेकर परेशान हैं और अधिकारियों का चक्कर लगा रहे हैं। अपनी बात सामने रखने के उद्देश्य को लेकर ही संगठन ने प्रधानमंत्री के खिलाफ अपना प्रत्याशी उतारने का निर्णय लिया है। प्रत्याशी का चयन भी हो चुका है लेकिन नाम का खुलासा यदि अभी कर दिया गया तो भ्रष्टाचार में लिप्त प्रशासनिक अमला उसे परेशान करने लगेगा। वहीं, अन्य राजनीतिक दलों के मुखिया और वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ भी प्रत्याशी उतारने के लिए जीवित मृतकों की तलाश में जुटी है।