आजमगढ़। कलेक्ट्रेट सभागार में गुरुवार शाम को अस्थायी गोवंश आश्रय केंद्र और गो संरक्षण समिति के गठन को लेकर स्वयंसेवी संस्थाओं और व्यवसायिक प्रतिष्ठानों के प्रतिनिधियों की बैठक डीएम शिवाकान्त द्विवेदी की अध्यक्षता में हुई। इस दौरान डीएम ने बताया कि गोशाला संचालन के लिए गो-संरक्षण समिति बनाई जा रही है। इसकी आजीवन सदस्यता शुल्क 11 हजार और वार्षिक सदस्यता शुल्क एक हजार है। लगभग 15 जनपदवासी और समिति में शमिल सभी अधिकारी इसके अजीवन सदस्य बने। समाजसेवी ज्ञानू सिंह ने गोशाला के लिए 51 हजार रुपये भेंट किए। डीएम ने सभी एनजीओ, प्रतिष्ठानों के प्रतिनिधियों से अपील की कि समिति की सदस्यता शुल्क जमा करके सदस्य बनेें। गो संरक्षण में सहयोग प्रदान करें। डीएम ने बताया कि तमौली में पशुचर की पर्याप्त जमीन है। इसपर अस्थाई गो संरक्षण केंद्र के लिए अस्थाई सेड बनाया जाएगा। इसमें 500 से एक हजार निराश्रित गोवंश रखे जाएंगे। यहां पशुचर की खाली जमीन पर गाय के गोबर और गो-मूत्र से खाद बनाई जाएगी। इसके साथ ही गोबर से गमले, गोनाइल, साबुन, अगरबत्ती आदि बनाने की शुरुआत की जाएगी। इसके मार्केटिंग की जिम्मेदारी हार्टीकल्चर और वन विभाग की होगी। समाजसेवी ज्ञानू सिंह 51 हजार की भेंट देकर इस समिति के अजीवन सदस्य बने, समिति में शामिल सभी अधिकारी और 15 अन्य जनपदवासी भी इसके सदस्य बने। डीएम ने बताया कि समिति में एक से डेढ़ करोड़ के फंड की व्यवस्था की जा रही है। ताकि पशुओं को अच्छी तरीके से संरक्षित किया जा सके है। पशुओं के रखरखाव के लिए कुछ लोगों को रखा भी जाएगा। समिति का बायलाज तैयार कर लिया गया है। इसमें डीएम की अधयाक्षता में एक विशेष कार्यकारिणी और आम सभा होगी। इसके साथ ही उन्होंने एसडीएम निजामाबाद को निर्देशित किया कि तहबरपुर स्थित पशुचर की जमीन को खाली कराते हुए बाउण्ड्री कराएं। एसडीएम सदर को निर्देशित किया कि शहर क्षेत्र के पशुचर की जमीनों का चिह्नांकन करें, रामपुर और मृत्युंजय अस्पताल के पीछे स्थित पशुचर की जमीन का निरीक्षण कर रिपोर्ट उपलब्ध कराएं। सीआरओ आलोक कुमार वर्मा, एडीएम गुरू प्रसाद, एडीएम प्रशासन नरेन्द्र सिंह, पालिकाध्यक्ष प्रतिनिधि प्रणीत श्रीवास्तव, सभी एसडीएम, स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।