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बिना जरूरत लगाई लाखों से इंटर लाकिंग, अब अदा कर रहे कर्ज

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आजमगढ़। नगरपालिका के खेल भी अजब-गजब हैं। जो सड़क हाईवे में मंजूर हो गई थी। उसके दोनों किनारों पर शासन से कर्ज लेकर इंटरलाकिंग टाइल्स लगा दी गई। जब हाईवे का कार्य शुरू हुआ तो टाइल्स उखाड़ ली गई। लगभग 50 लाख की टाइल्स कहां गई इसका कोई हिसाब नहीं है। राज्य वित्त से हर माह मिलने वाली धनराशि से इसकी अच्छी-खासी किस्त कट जाती है। नतीजतन सफाईकर्मियों के पारिश्रमिक और अन्य भुगतान नहीं हो रहे हैं। डीएम सुहास एलवाई के कार्यकाल में नरौली चौक से हाइडिल चौराहे तक सड़क के दोनों तरफ 50 लाख की ज्यादा की लागत से इंटरलाकिंग टाइल्स लगाई गई थी। ये सड़क पहले ही हाईवे में आ गई थी और चौड़ीकरण प्रस्तावित था। इसके बाद भी पीडब्ल्यूडी ने कार्य को एनओसी दे दी और काम भी हो गया। कार्य शासन से बिना ब्याज के तहत मिले ऋण से कराया गया। डीएम को पता चला तो उन्होंने जांच बिठा दी। बाद में भुगतान कर दिया गया। चार माह बाद ही चौड़ीकरण हुआ तो टाइल्स उखाड़ ली गई। अब 50 लाख के खर्च में इसका लोगों को कितना लाभ मिला इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। वहीं टाइल्स किसके पास ये एक-दूसरे पर थोपा जा रहा है। पालिका के जेई का कहना है कि टाइल्स ईओ के आदेश पर संबंधित ठेकेदार को सौंपा गया था। ठेकेदार का कहना है कि टाइल्स पालिका के जेई की कस्टडी में है। हो सकती है कुछ मेरे पास हो। वैसे काफी टाइल्स मिट्टी में दबने से टूट भी गई थी। मसलन पूरे पैसे या तो बर्बाद हो गए या टाइल्स का कहीं और प्रयोग कर फिर भुगतान करा लिया गया होगा। जयराम, जेई ने कहा कि नरौली चौराहे से हाइडिल चौराहे तक टाइल्स उखाड़ी गई थी। टाइल्स को तकत्लीन ईओ दिनेश विश्वकर्मा के निर्देश पर संबंधित ठेकेदार के सुपुर्द किया गया था। उन्हीं के पास अभी भी होगी। अजय सिंह, ठेकेदार ने कहा कि कुछ टाइल्स को पालिका के जेई ने अपनी कस्टडी में रख लिया था। कुछ मेरे पास होगा। काफी टाइल्स मिट्टी में दबने के कारण टू गई थी। प्रशांत कुमार, प्रभारी ईओ ने कहा कि मामला काफी पहले का है। इसकी पूरी जानकारी नहीं है। पालिका कर्मियों से पता करके पता करूंगा की इतनी लागत की टाइल्स कहां और किस अवस्था में है।
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