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केस दर्ज होते ही गिरफ्तार किए जाएंगे आरोपी

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आजमगढ़। दहेज उत्पीड़न की धारा 498 ए में सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों की बेंच द्वारा किए गए संसोधन के विषय में पुलिस वालों को विधिवत जानकारी देने के लिए रविवार को पुलिस लाइन परिसर में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन एसोसिएशन फॉर एडवोकेसी एंड लीगल इनीशिएटिव्स (आली) की तरफ से किया गया था। कार्यशाला में मौजूद पुलिसवालों को जानकारी देते हुए आली संस्था की अधिवक्ता अंचन ने बताया कि राजेश शर्मा बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले में दो जजो की पीठ ने भारतीय दंड संहिता की धारा 498ए के दुरुपयोग के बारे में जो निर्णय दिया था। उसमें सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा, एएम खानविलकर और डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच ने संशोधन कर दिया। नए नियम के तहत अब दहेज उत्पीड़न के मामलों में शिकायतकर्ता लड़की के पति और ससुराल वालों को रिपोर्ट दर्ज करने के तत्काल बाद ही गिरफ्तार किया जा सकता है। जबकि इससे पहले दो जजों की पीठ ने इस पर यह कहते हुए रोक लगा दी थी कि इस धारा का दुरुपयोग होता है। इसलिए इस बारे में कोई गिरफ्तारी तब तक नही की जा सकती है। जब तक इस मामले में गठित परिवार कल्याण समिति गिरफ्तारी की अनुशंसा नहीं कर देती है। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि परिवार कल्याण समिति एक न्यायिक अथॉरिटी है। जो पुलिस और न्यायालय का काम नही कर सकती है। कोर्ट ने कहा कि जो फैसला दिया गया है। वह सीआरपीसी के खिलाफ है और यह विधायिका के क्षेत्र में हस्तक्षेप जैसा है। वे संपूर्ण रूप से संरचना के अनुरूप नही है। पीठ ने उस गाइड लाइन को भी हटा दिया है, जिसमें स्थानीय परिवार कल्याण समितियों की रिपोर्ट से पहले गिरफ्तारी पर रोक लगाई गई थी। इसके साथ पीठ ने गिरफ्तारी के अधिकार को फिर से पुलिस को दे दिया है, लेकिन साफ कहा है कि पुलिस को इस अधिकार का प्रयोग करने के पहले अपने विवेक का प्रयोग करना चाहिए। इस अवसर पर एसपी ग्रामीण नरेंद्र प्रताप सिंह, सीओ सदर मो. अकमल खां के अलावा सभी थानों के 31 दरोगा, मानवाधिकार कार्यकर्ता तारिक शफिक और आली कार्यकर्ता अंशुमाला, आलिमा, कनीज, लीला, सोनी और नसरीन आदि मौजूद रहे।
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