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जांच में अभिलेख मिले फर्जी, फिर भी नहीं हुई कार्रवाई

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आजमगढ़। बेसिक शिक्षा विभाग के खेल भी निराले हैं। फर्जी शिक्षकों पर कार्रवाई भी हो रही है, इसके बाद विभागीय मिलीभगत से भी इनका मकड़जाल बढ़ता जा रहा है। रिपोर्ट आने के बाद भी विभाग की ओर से सैकड़ों फर्जी शिक्षकों को प्रतिमाह भुगतान किया जा रहा है। एबीएसए की जांच में मई 2018 में शिक्षिका के अभिलेख फर्जी साबित होने के बाद भी विभाग की मेहरबानी से प्रमोशन कर उसे इंग्लिश मीडियम विद्यालय की शिक्षिका बना दिया गया। मेंहनगर विकास खंड के प्राथमिक विद्यालय करनपुर में पूर्व में तैनात रही शिक्षिका सुनीता तिवारी पर वहीं के प्रधानाचार्य रमेश कुमार ने आरोप लगाए थे कि फर्जी अभिलेख लगाकर विकलांग कोटे से नौकरी हासिल की है। इस शिकायत पर मई 2018 में इसकी जांच की जिम्मेदारी खंड शिक्षा अधिकारी दीनानाथ साहनी को सौंपी गई। देवरिया जनपद से जारी विकलांगता प्रमाण पत्र की सत्यापन रिपोर्ट में ये बात साबित हो गया कि सुनीता तिवारी की ओर से लगाया गया विकलांगता प्रमाण पत्र फर्जी है। इस बीच सुनीता तिवारी का चयन से रानी की सराय विकास खंड के शाह कुद्दनपुर स्थित इंगलिश मीडियम स्कूल में कर दिया गया। खंड शिक्षाधिकारी की जांच रिपोर्ट मिलने के बाद भी रिपोर्ट पर कार्रवाई न कर अब तक उक्त शिक्षिका को बचाने में विभाग जुटा है। खंड शिक्षा अधिकारी, दीनानाथ साहनी ने बताया कि मई 2018 में ही मैंने ये जांच की थी। देवरिया से सुनीता तिवारी के विकलांगता प्रमाण पत्र की जांच कराई गई तो वहां से बताया कि उनकी ओर से प्रमाण पत्र निर्गत नहीं किया गया है। इसकी रिपोर्ट मैंने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को सौंप दी थी। जून माह में मेरा स्थानांतरण हो गया। इस बीच क्या कार्रवाई हुई मुझे कोई जानकारी नहीं।
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मुझे इस प्रकरण की जानकारी नहीं है, लेकिन अगर रिपोर्ट आई है तो दिखवा लेंगे। फर्जी साबित होने पर कार्रवाई की जाएगी।
देवेंद्र कुमार, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी।
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