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अवशेष को खेत में सड़ा भूमि की उर्वराशक्ति बढ़ाएं किसान

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आजमगढ़। फसल अवशेष प्रबंधन इन सीटू योजनांतर्गत प्रशिक्षण का आयोजन कृषि विज्ञान केन्द्र कोटवा में गुरुवार को संपन्न हुआ। इसमें जनपद के विभिन्न विभागों में कार्यरत कुल 73 कृषि प्रसार कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। मुख्य अतिथि जिला उद्यान अधिकारी बीके वर्मा रहे। अध्यक्षता कर रहे केन्द्र प्रभारी अधिकारी डा. आरके सिंह ने बताया कि केंद्र सरकार की ओर से फसल अवशेष प्रबंधन को परियोजना संचालित करने के लिए पूर्वांचल के तीन कृषि विज्ञान केन्द्र जौनपुर, बनारस और आजमगढ़ को चिह्नित किया है। उन्होंने फसल अवशेष को खेत में सड़ाकर भूमि की उर्वराशक्ति बढ़ाने एवं स्वस्थ अन्न उत्पादन करने पर बल दिया। केन्द्र के वैज्ञानिक डा. आरपी सिंह ने डिकम्पोजर वैक्टीरिया, कवक से अवशेष प्रबंधन करने पर जोर दिया। डा. रणधीर नायक ने फसल अवशेष प्रबंधन से मृदा के भौतिक एवं जैविक गुणों के विकास के बारे में जानकारी दी। डा. एलसी वर्मा ने बताया कि एक टन धान का पुआल जलाने पर 5.50 किग्रा नाइट्रोजन, 1.32 किग्रा गंधक, 3.2 किग्रा फास्फोरस, 25 किग्रा पोटाष अवं 400 किग्रा जैविक कार्बन का नुकसान होता है। मृदा में पाए जाने वाले सूक्ष्म जीव भी प्रभावित होते हैं, जिससे फसल उत्पादन प्रभावित होता है। डा. आरके आनन्द ने सुझाव दिया कि बेलर एवं हैप्पी सीडर से फसल अवशेष प्रबंधन करते हुए खेती की लागत कम की जा सकती है। प्रशिक्षण में उत्तर प्रदेश भूमि सुधार निगम के प्रसार कार्यकर्ता सुमन सिंह, ओमलता तिवारी, अस्मिता सिंह, सुनीला मौर्य, सुमन मिश्रा, प्रतिमा त्रिपाठी, दीपक रानी, सुषमा राय, साहब राज पांडेय, अरुण सिंह, बृजेश कुमार, संतराज वर्मा, रामजीत मौर्य, श्रीराम, विवेक तिवारी एवं कृषि विभाग के अखिलेश कुमार, कैलाश नाथ, राजकुमार, वरुण कुमार, कमलेश सहित कुल 73 प्रसार कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।
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