आजमगढ़। वर्ष 2018 में जनपद की बहुत सी आशाएं अधूरी रह गई। जैसे सिधारी रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण, हरिऔध कला भवन और शाही पुल पर नए पुल का निर्माण पूरा होने की उम्मीद लगाए बैठे थे। इसके साथ ही सबसे बड़ी आशा लोगों ने विश्वविद्यालय के लिए लगा रखी थी लेकिन यह पूरी नहीं हो सकी। लेकिन नए साल में इन सबके पूरी होने की आशा लोग लगाए बैठे हैं। जनपद को सपा का गढ़ कहा जाता है। 2017 के विधानसभा चुनाव में भी यह बात स्पष्ट हो गई जब मोदी लहर में भी जनपद में सिर्फ एक सीट भाजपा के खाते में आई। लोगों को उम्मीद थी यहां की सीटें हारने के बाद बीजेपी इस जनपद पर खास धन देगी। दूसरे यह जनपद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जनपद से सटा हुआ है। इसलिए यहां भी विकास की गंगा बहेगी। लेकिन लोगों की इस आशा पर उस तुषारापात हो गया जब सपा सरकार में संचालित योजनाएं जो पूर्ण होने की कगार पर थी बजट के अभाव में लटक गई। लेकिन वर्तमान में इन योजनाओं पर कार्य शुरू हो चुका है। जिसके 2019 में पूरा होने की संभावना है। इसके अलावा जनपदवासियों की सबसे बड़ी मांग विश्वविद्यालय की थी। लोगों को आशा थी कि सपा सरकार ने उनकी जिस आशा को पूरा नहीं किया उसे भाजपा सरकार जरूर पूरा करेगी। इसके लिए कई आंदोलन हुए लेकिन सरकार ने नहीं सुनी। लेकिन नए साल में जनपद वासी सरकार ने जनपद में एक राज्य आवासीय विश्वविद्यालय की स्थापना किए जाने की आस लगाए हुए हैं।