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पिता-पुत्र समेत छह को दस वर्ष की कैद

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आजमगढ़। अपर सत्र न्यायाधीश धु्रव राय की अदालत ने शुक्रवार को गैर इरादतन हत्या के आरोपी पिता-पुत्र समेत छह लोगों को दोषी पाते हुए दस वर्ष की कैद की सजा सुनाई। साथ ही 14-14 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया। घटना दीदारगंज थाना क्षेत्र के चितारा महमूद गांव की है। चितारा महमूद गांव में 23 अप्रैल 2010 को शशिकांत की गंभीर चोट लगने से उपचार के दौरान अस्पताल में मौत हो गई थी। इस मामले में घायल मृतक का पिता रिखई ने स्थानीय थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। मुकदमे में कहा था कि घटना की सुबह लगभग पांच बजे मै अपने गन्ने के खेत में गुड़ाई करने गया था। पुरानी रंजिश को लेकर गांव के आरोपी लाठी-डंडे से लैस होकर आए और मेरे लड़के को बुरी तरह से मारा-पीटा और वह मरणासन्न हो गया। इलाज के लिए उसे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मार्टीनगंज भेजा गया। बाद में उसे जिला अस्पताल ले जाया गया। जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। इस मामले में दीदारगंज थाना पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर रामप्यारे राजभर पुत्र बलदेव, विजय पुत्र राम प्यारे, विनोद पुत्र दुलारे, सुनील और हरमन पुत्रगण इंद्रजीत और रमेश पुत्र कैलाश के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया। मुकदमे के परीक्षण के दौरान अभियोजन पक्ष की तरफ से पैरवी कर रहे शासकीय अधिवक्ता सोरख यादव ने इस मुकदमे के वादी रिखई, नखड़ू, ईद्दू राम, सिपाही लालू राम, डा. जीएन केशरवानी, निरीक्षक ज्ञानेश्वर मिश्रा, सेवानिवृत्त एसआई राजेंद्र प्रसाद सरोज, एसआई भूपेंद्र कुमार सिंह और धर्मेंद्र प्रसाद को अदालत में बतौर साक्षी पेश किया। अदालत ने उभय पक्षों के तर्को को सुनने के बाद गैर इरादतन हत्या के आरोपी राम प्यारे, विजय, विनोद, सुनील, हरमन और कैलाश को दोषी पाते हुए उक्त सजा का निर्धारण किया।
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