आजमगढ़। पवई ब्लाक के मुतकल्लीपुर में शिकायत पर हुई प्रधानमंत्री आवासों की जांच में डीआरडीए के परियोजना निदेशक ने अपात्रों का पात्र दिखाने के लिए प्रधान और वीडियो को एफआईआर दी धमकी देकर 25 हजार वसूल लिए। इसके बाद अपात्रों को पात्र दिखाते हुए कमिश्नर को रिपोर्ट भी दे दी। कमिश्नर के निर्देश पर सीडीओ की जांच में मामले की पोल भी खुल गई। कमिश्नर ने प्रमुख सचिव ग्राम्य विकास को मामले में कार्रवाई के लिए रिपोर्ट भी भेजी, इसके बाद भी मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई। इससे शासन की मंशा पर अब सवाल उठने लगे हैं। पवई ब्लाक के मुतकल्लीपुर निवासी महेंद्र श्रीवास्तव पुत्र देवी गुलाम श्रीवास्तव ने डीएम से शिकायत की थी कि गांव में वर्ष 2016-17 और 2017-18 में अपात्रों को प्रधानमंत्री आवास आवंटित किए गए हैं। मामले की जांच डीआरडीए के परियोजना निदेशक को सौंपी थी। 29 नवंबर 2017 को पीडी डीडी शुक्ल ने रिपोर्ट सौंपी की कोई भी अपात्र नहीं है। इसके बाद शिकायतकर्ता ने कमिश्नर से शिकायत की गई जांच अधिकारी पीडी डीडी शुक्ल ने प्रधान जितेंद्र और ग्राम विकास अधिकारी कन्हैया राम को एफआईआर की धणकी देकर 50 हजार रुपये रिश्वत वसूल ली। इसके बाद लाभार्थी पतिराम पुत्र रामजश और पप्पू पुत्र बाबूराम को पात्र बता दिया गया। शिकायत मिलने के बाद कमिश्नर ने तत्कालीन सीडीओ अभिषेक सिंह से मामले की जांच कराई। सीडीओ ने 17 फरवरी 2018 को गांव में जांच की। प्रधान जितेंद्र राम ने जांच के दौरान बताया कि पप्पू पुत्र बाबूराम के मकान की छत गिरी हुई थी। दीवारें पुरानी होने के कारण मैंने आवास स्वीकृत किया था। जांच के दौरान पप्पू को पात्र घोषित करने के लिए परियोजना निदेशक ने उनसे 25 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की। साथ ही प्रधान और वीडियो को एफआईआर कराने की धमकी भी दी। प्रधान ने कबूल किया कि उसने बचने के लिए के लिए भट्ठा मालिक संजय सिंह से 25 हजार रुपये लेकर परियोजना निदेशक को दिए। भट्ठा मालिक ने भी इसकी पुष्टी की थी। बकायदा बयानों की वीडियो रिकार्डिंग भी की गई थी। इसके लिए परियोजना निदेशक डीडी शुक्ल को दोषी मानते हुए पूरे प्रकरण की रिपोर्ट अप्रैल माह में कमिश्नर को सौंप दी गई थी। कमिश्नर ने प्रमुख सचिव ग्राम्य विकास को रिपोर्ट भेजकर पीडी पर कार्रवाई की संतुति की थी। इसके बाद भी अभी तक मामले में कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है। इससे शासन से भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन के दावे पर सवालिया निशान लगने लगे हैं। एसवीएस रंगाराव, कमिश्नर ने बताया कि जांच रिपोर्ट को प्रमुख सचिव ग्राम्य विकास को प्रेषित किया गया था। आगे की कार्रवाई वहीं से होनी है। इस बारे में फिर रिमाइंडर दिया जाएगा।