फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Azamgarh News: 25 भवन ऐसे जो कभी भी गिर सकते हैं, अभी तक जर्जर मकानों की मार्किंग नहीं

विज्ञापन
विज्ञापन
आजमगढ़। जिले में वर्षों से जर्जर मकानों का चिह्ाकंन नहीं किया गया है, शहर में पुरानी कोतवाली, आसिफगंज, सब्जी मंडी चौराहा और कोट आदि जगहों पर सड़कों के किनारे कम से कम 25 ऐसे जर्जर भवन हैं, जो कभी भी ढह सकते हैं। प्रशासन की सख्ती न करने की वजह से इन जर्जर भवनों में अभी भी लोग रह रहे हैं। इससे गंभीर दुर्घटनाओं की आशंका हर समय बनी रहती है।
विज्ञापन

देश के विभिन्न जिलों में जर्जर भवनों के गिरने की घटनाएं आए दिन मीडिया में देखने और सुनने को मिलती हैं। ऐसे हादसे अक्सर बरसात में होते हैं जब कमजोर मकान बारिश के पानी और नमी के कारण ध्वस्त हो जाते हैं। इसके बावजूद, नगर पालिका प्रशासन की ओर से न तो किसी प्रकार का सर्वेक्षण किया जा रहा है। न ही इन मकानों की मरम्मत या हटाने के लिए कोई योजना ही बनाई गई है। शहर की सड़कों पर कई जर्जर भवन मुंह बाए खड़े हैं। नगर पालिका की ओर से अभी तक कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है।

00

अचानक धराशाई हो गया जर्जर भवन

एक हफ्ता पूर्व ही आसिफगंज में मुख्य मार्ग पर स्थित जर्जर मकान अचानक धराशाई हो गया। पूरा मलबा सड़क पर बिखर गया। इसके कारण एक घंटे तक मुख्य मार्ग पर आवागमन बाधित रहा। काफी देर बाद मजदूरों को बुलाकर मलबे को हटवाया गया तब जाकर आवागमन शुरू हो सका। गनीमत रही कि उस समय अगल-बगल कोई मौजूद नहीं था। नहीं तो किसी भी बड़ हादसे से इन्कार नहीं किया जा सकता।
विज्ञापन


00

एडीए और नगरपालिका प्रशासन में समन्वय नहीं

नगर क्षेत्र में जगह-जगह जर्जर मकान दुर्घटना को आमंत्रण दे रहे हैं। वहीं एडीए और नगरपालिका के चक्कर में अब तक नगर क्षेत्र में जर्जर मकानों की पहचान नहीं हो सकी है। इसका परिणाम यह है कि लोगों के सिर पर दुर्घटना का खतरा मंडरा रहा है।

कोट

भवनों के मानचित्र स्वीकृत करने से लेकर उनके जर्जर होने का चिन्हांकन करने की जिम्मेदारी आजमगढ़ विकास प्राधिकरण की है। यह कार्य नगरपालिका की ओर से नहीं किया जाता है।

विवेक त्रिपाठी, ईओ नगरपालिका।

00

यह काम एडीए का नहीं है। इसी बात का तो नगर पालिका टैक्स लेती है। वैसे अगर कोई व्यक्ति जर्जर भवन होने की शिकायत करता है तो एसडीएम भवन स्वामी को नोटिस जारी करता है। अगर वह निर्माण हटा लेता है तो ठीक, वरना भवन को धराशाई कराकर खर्च की वसूली की जाएगी।
विज्ञापन


आजाद भगत सिंह, एडीए सचिव और एडीएम वित्त एवं राजस्व।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें