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आदर्श पाठ की तरह नहीं भूले जा सकते स्व. मिश्र

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आजमगढ़। आजमगढ़ के मालवीय कहे जाने वाले पंडित कुबेर मिश्र के सम्मान में शनिवार को हीरापट्टी स्थित एक मैरेज हाल में बाबू कृष्ण मुरारी सिंह स्मृति न्यास की ओर से स्मृति संध्या का आयोजन किया गया। जिसमें लोगों ने स्व. कुबेर मिश्र को पुष्प अर्पित कर श्रद्घांजलि दी। कार्यक्रम के आयोजक खड़ग बहादुर सिंह ने कहा कि आठ जुलाई 1930 को सगड़ी तहसील के करसौली गांव में कुबेर मिश्र का जन्म हुआ था। पंडित जी का जीवनवृत्त और कृतित्व बेहद एक आदर्श पाठ की तरह है, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। एक घटना का जिक्र करते हुए बताया कि धनाभाव के कारण जब उनका नाम विद्यालय से काट दिया गया तो उन्होंने संघर्षों के साथ खुद को शिक्षित किया। इसके बाद मालवीय जी की तर्ज पर सगड़ी जैसे पिछड़े क्षेत्र में शिक्षा की अलख जगाने के लिए भिक्षाटन कर मालटारी महाविद्यालय की 1949 में स्थापना किया। जिसके लिए पंडित जी म्यांमार देश तक की यात्रा किए। जिसके लिए उन्हें तत्कालीन पूर्व पीएम ने पंडित जी को पूर्वांचल के महामना की संज्ञा देकर सम्मानित किया। आज उन्हीं के लगाए शिक्षा रूपी पौध से कई संस्थाएं संचालित हो रही हैं। जिससे कई पीढ़ियां युवाओं और बालिकाओं का जीवन संवर रहा है। आजमगढ़ में कई शिक्षा का मंदिर स्थापित कराने वाले पंडित जी को मारीशस में सम्मानित किया गया। पंडित जी द्वारा दिखाए गए मार्ग पर चलकर ही उन्हें सच्ची श्रद्धाजंलि दी जा सकती है। भाजपा जिलाध्यक्ष जयनाथ सिंह ने कहा कि शिक्षा से ही समाज का विकास संभव है। सपा जिलाध्यक्ष हवलदार यादव ने पंडित जी को नमन करते हुए उन्हें आत्मसात करने का संकल्प दिलाया। हीरा शर्मा और साहित्यकार डा. कन्हैया सिंह ने कहा कि पंडित जी के अधूरे सपनों को साकार करना हम सभी की जिम्मेदारी है। दीनानाथ लाल श्रीवास्तव, जगत नारायण, पूर्व प्रधानाचार्य सूबेदार सिंह, श्यामा चरण राय, कुबेर मिश्रा आदि ने संबोधित किया। इस मौके पर उमाकांत मिश्र, संध्या मिश्र, ज्ञानेंद्र सिंह ज्ञानू, जयनारायण मिश्र, अभिषेक सिंह सोनू, अमरनाथ तिवारी, दुर्गा प्रसाद अस्थाना आदि उपस्थित थे।
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