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पुरुषों को लेनी होगी भेदभाव रहित समाज बनाने की जिम्मेदारी

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आजमगढ़। भेदभाव रहित समाज बनाने की जिम्मेदारी पुरुषों को लेनी पड़ेगी, परिवार नियोजन की जिम्मेदारी केवल महिलाओं की नहीं है। ग्रामीण पुनर्निर्माण संस्थान के राजदेव चतुर्वेदी ने शनिवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि बेटियों को बेटे की तुलना में कमतर आंका जाता है। कहा कि प्रदेश में भेदभाव और हिंसा से जुड़े तथ्यों को देखें तो 15 से 45 साल की 38 फीसदी लड़कियां एवं महिलाएं शारीरिक या यौन हिंसा की शिकार हैं। 15 से 45 साल की उम्र की शादीशुदा महिलाओं में 44 फीसदी से ज्यादा हिंसा की शिकार हैं। 2015 में यूपी में महिलाओं के साथ साढ़े 35 हजार से ज्यादा हिंसक अपराध की घटनाएं पुलिस के पास दर्ज हुई हैं। प्रदेश की 77.70 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है। गर्भनिरोधक विधि का प्रचलन दर उप्र में 38 प्रतिशत है। देश में यह औसत दर 54 प्रतिशत है। जनपद मे पर्याप्त संख्या मे पैरामेडिकल सेवा प्रदाताओं के माध्यम से गर्भावस्था में अंतराल के तरीकों को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है। ग्रामीण पुनर्निर्माण संस्थान एवं अन्य स्वैछिक संगठनों की ओर से समाजिक मानदण्डों में बदलाव पर अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने इससे जुड़ने की अपील की है।
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