आजमगढ़। मुबारकपुर पालिका में गाटा संख्या 18 पोखरी के नाम से सरकारी अभिलेखों में दर्ज है। पहले भी इसे लोगों को राजस्व कर्मियों की मदद से भूमिधरी दर्ज करा लिया था। वर्ष 2016 में एसडीएम ने सभी नामों को खारिज करते हुए इसे पोखरी के नाम दर्ज करा दिया था। कुछ अवैध निर्माण को गिराया भी गया था। वर्तमान में पोखरी पर धड़ल्ले से अवैध कब्जा कर निर्माण करा दिया गया है। जिम्मेदार प्रशासन मौन धारण किए हुए हैं। मामले की जानकारी मिलने के बाद एडीएम वित्त एवं राजस्व ने एसडीएम सदर को मामले की जांच के आदेश दिए हैं। कस्बे में पालिकाध्यक्ष की ओर से कुछ सरकारी पोखरियों को लेखपाल की मिलीभगत से भूमिधरी दर्ज करा अवैध कब्जा कराने का आरोप लगा था। अभी ये मामला ठंडा भी नहीं पड़ा था कि कस्बे की ही गाटा संख्या 18 में स्थित 1.180 एकड़ की पोखरी पर धड़ल्ले से अवैध कब्जे का मामला समाने आया है। इस पोखरी के कुछ हिस्सों पर पहले भी अभिलेखों में गड़बड़ी कर कब्जा कर लिया गया था। इसकी शिकायत तहसील प्रशासन से की गई थी। वर्ष 2016 में तत्कालीन एसडीएम दिवाकर सिंह ने भूमि को फिर से पोखरी के खाते में दर्ज कराने के आदेश दिए थे। आदेश के बाद तहसील प्रशासन ने पोखरी से कुछ छोटे कब्जेदारों को हटाया जरूर, लेकिन अन्य को ईवैसे ही छोड़ दिया। वर्तमान में भी गाटा संख्या 18 अभिलेखों में पोखरी के नाम से दर्ज है। इसके बाद भी पोखरी पर धड़ल्ले से कब्जा किया जा रहा है। सिर्फ कब्जा ही नहीं किया जा रहा है बल्कि पक्के निर्माण भी कराए जा रहे है, लेकिन तहसील प्रशासन मूक दर्शक बना हुआ है। राजनीतिक दवाब में कब्जेधारियों पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। शनिवार को मामला एडीएम वित्त एवं राजस्व गुरु प्रसाद के पास पहुंचा तो उन्होंने एसडीएम सदर अरुण कुमार सिंह को मामले की जांच के आदेश दिए हैं।
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