आजमगढ़। किसान पाठशाला के प्रथम चरण के प्रथम दिन गुरुवार को किसानों की आय दोगुनी करने की रणनीति, एकीकृत फसल प्रबंधन, पशुपालन, उद्यान, दुग्ध उत्पादन, मधुमक्खी पालन, टिकाऊ खेती, फसल चक्र के सिद्धान्त, गर्मी की जुताई हरी खाद, कम्पोस्ट खाद, बर्मी कम्पोस्ट का महत्व, फसल अवशेष प्रबंधन तथा जैविक खेती विषय पर प्रशिक्षित किया गया। ब्लाक जहानागंज केे ग्रामसभा रामपुर दरिया में उप परियोजना निदेशक (आत्मा) डा. पंकज सिंह ने किसानों को आय दोगुनी करने के लिए तीन महत्वपूर्ण बातें बताईं। उत्पादन लागत कम करना, उत्पादन बढ़ाना और मूल्य संर्वधन एवं लाभकारी विपणन के बारे में जानकारी दी। एकीकृत फसल प्रणाली-दो या दो से अधिक फसलें एक साथ, मिश्रित फसलों के साथ बागवानी, पशुपालन, अन्त:फसली खेती तथा सब्जी की खेती करने से किसानों के फार्म की लागत कम होती है और आय में वृद्धि होती है। जिला कृषि अधिकारी और डा. राम केवल ने महराजगंज के ग्राम गोपालपुर में पाठशाला में प्रतिभाग किया गया। दलहनी फसलों के बाद खाद्यान्न फसलें अधिक पानी के बाद कम पानी वाली फसल, गहरी जड़ के बाद उथली जड़ तथा अधिक पोशक तत्व चाहने वाली फसल के बाद कम पोषक तत्व चाहने वाली फसलों को उगाने से मृदा स्वस्थ रहती है। उत्पादन लागत कम होती है। पाठशाला में संबंधित ग्राम प्रधान सहित सम्मानित किसान उपस्थित रहे।