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रायल्टी के चक्कर में पर्यावरण से खिलवाड़ कर रहा खनन विभाग

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आजमगढ़। रायल्टी के निर्धारित लक्ष्य को हासिल करने के लिए खनन विभाग पर्यावरण की बलि चढ़ाने पर तुला हुआ है। एनजीटी ने पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहे ईंट भट्ठों को बंद करने का आदेश दो बार पहले भी जारी किया था लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इससे एक तो एनजीटी के आदेशों की अवहेलना हो रही है, दूसरे पर्यावरण को नुकसान भी हो रहा है। पूरे विश्व में पर्यावरण को हो रहे नुकसान से हाय तौबी मची हुई है। हर देश पर्यावरण को बचाने के प्रयास में जुटा है। वहीं, खनन विभाग अपनी रायल्टी के चक्कर में पर्यावरण से खिलवाड़ कर रहा है। जिले में 648 ईंट भट्ठे चल रहे हैं। इन भट्ठों से खनन विभाग को लाखों रुपये की रायल्टी प्रतिवर्ष प्राप्त होती है। शासन से निर्धारित राजस्व वसूली के लिए लक्ष्य को विभाग इन्हीं माध्यमों से हासिल करता है। इसके लिए विभाग मनमानी पर तुला हुआ है। 2010 और 2014 में भी एनजीटी ने बिना एनओसी के जिले में संचालित ईंट भट्ठों को बंद करने का आदेश दिया था लेकिन विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की। अब तीसरी बार 29 जनवरी 2019 को जिले के 562 ईंट भट्ठों को बंद करने का आदेश दिया गया है लेकिन अब भी विभाग कार्रवाई करने से कतरा रहा है। ईंट भट्ठा संचालक कृष्ण चंद्र राय ने बताया कि अगर एनजीटी के इस आदेश को पालन होता है तो जनपद में लगभग 10 से 12 हजार की संख्या में लोग बेरोजगार हो जाएंगे। इसमें बहुत ज्यादा संख्या ऐसे लोगों की होगी जो गैर प्रांतों जैसे बिहार, झारखंड और उड़ीसा से कार्य करने के लिए यहां आते हैं। इनके अलावा वह लोग भी बेरोजगार हो जाएंगे जो ट्रैक्टर, ट्राली के जरिए ईंटों को उपभोक्ताओं तक पहुंचाते हैं। इनके साथ ही ईंट भट्ठे का उद्योग चला रहे ईंट भट्ठा संचालक भी बेरोजगार हो जाएंगे।
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