आजमगढ़। दलालघाट स्थित मौलाना याकूब रहमतुल्लाह अलैह का 115वां उर्स मंगलवार को बड़ी ही अकीदत के साथ मनाया गया। मजार शरीफ पर अकीदतमंदों ने चादर चढ़ाकर परिवार के लिए दुआ मांगी। सुबह सात बजे मजार शरीफ पर कुरआनख्वानी हुई। शाम चार बजे तकिया स्थित मुस्लिम मुसाफिर खाने से गागर, चादर का जुलूस कव्वाली के साथ निकाला गया। जो तकिया, कोट चौराहा, जालंधरी, टेढ़िया मस्जिद, बाजबहादुर, राजा साहब का किला होते पुन: कोट चौराहा होते हुए दलालघाट स्थित मजार पर पहुंचा, जहां चादरपोशी की गई। शाम छह बजे ईद मिलादुन्नबी का आयोजन हुआ। इसके बाद लंगर चलाया गया। इस लंगर में काफी लोग शामिल हुए। लंगर के बाद रात आठ बजे से कव्वाली का आयोजन हुआ, जो देर रात तक चलता रहा। अकदीतमंदों ने कव्वाली का जमकर लुत्फ उठाया। मजार शरीफ के मोतवल्ली शकील अहमद ने बताया कि मौलाना याकूब रहमतुल्लाह अलैह इलाहाबाद के रहने वाले थे। उनका जनपद में आगमन 1807 ई. में हुआ। उन्होंने तीस वर्ष की अवस्था में फकीरिया ले लिया। उन्हें कुतुब का दर्जा हासिल है। हजरत याकूब साहब का इंतेकाल 1900 ई. में हो गया। उर्स की देखभाल में वसीम अहमद, नियाज अहमद, अंसार अहमद आदि शामिल रहे।