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बिना रोशनी महिलाओं को बना रहीं आत्मनिर्भर 2

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आजमगढ़। बिना रोशनी महिलाओं को अपने बूते खड़ा होने के लिए प्रेरणा देने वाली विभा गोयल का मानना है कि आज भी लोगों की मानसिकता लड़कियों के प्रति नहीं बदली है। आज लड़कियां कहां से कहां पहुंच गई। हर क्षेत्र में वह अपनी कामयाबी का झंडा गाड़ रही हैं। लेकिन इन सबके बाद भी लोग लड़कियों के प्रति अपनी भावना को बदल नहीं पा रहे हैं। नगर के सब्जी मंडी चौराहा स्थित न्यू कला केंद्र का संचालन विभा गोयल द्वारा किया जाता है। आंख से कुछ भी न दिखने के बावजूद यह अपने हाथों के हुनर से अपना और परिवार का भरण पोषण करती हैं। इसके साथ ही यह महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उन्हें सिलाई, कढ़ाई, बुनाई, पेटिंग, मेंहदी, डांसिंग, ढ़ोलक बजाना आदि को सिखाती है। आज इनके यहां लगभग 60 से 70 महिलाएं हैंडी क्राफ्ट आदि के सामान बनाने की कला सीखने के लिए पहुंचती हैं। इनकी कला से प्रसन्न होकर 2013 के विधान सभा चुनाव में तत्कालीन स्वीप प्रभारी ऋतु सुहास ने इन्हें आइकान बनाया था। इस दौरान उन्होंने मतदाताओं को जागरूक करने के लिए शहर से लेकर गांव तक कार्य किया। वर्तमान में विलुप्त होती कत्थक नृत्य की कला को जिंदा रखने के लिए इनके द्वारा अपने सेंटर पर कत्थक कार्यशाला चलाई जा रही है। विभा गोयल ने कहा कि आज हर क्षेत्र चाहे समाज सेवा हो या देश सेवा हर जगह महिलाएं अपनी सशक्त भूमिका निभा रही हैं। सरकार भी महिलाओं के लिए अनेक योजनाओं का संचालन कर रही है। लेकिन इसके बाद भी आज तक महिलाओं के प्रति लोगों की भावना में कोई बदलाव नहीं आया है। सरकार के बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना का लाभ मात्र 20 प्रतिशत लोग ही उठा रहे हैं। सबसे दुख इस बात को देखकर होता है कि पढ़े-लिखे लोग भी आज भ्रूण हत्या करने से पीछे नहीं हट रहे हैं। क्योंकि अगर ऐसा नहीं होता है आज जनपद में 1000 लड़कों पर 917 लड़कियां ही नहीं होती। इसके लिए जागरूकता जरूरी है जब तक जागरूकता और लोगों की संवेदना नहीं बढ़ेगी तब तक लड़कियों की इसी तरह से भ्रूण हत्या होती रहेगी।
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