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मउपरासिन गांव में एक-एक कर 17 लोगों की हई मौतें, गांव में पसरा सन्नाटा

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कोरोना की बेकाबू रफ्तार ग्रामीण इलाकों को अपनी जद में लेती जा रही है। हालात ये हैं कि लगातार हो रही मौतों से ग्रामीण दहशत में हैं। पंचायत चुनाव के बाद से हालात और भी बिगड़ गए हैं। तरवां विकास खंड के मउपरासिन गांव में पंचायत चुनाव के बाद कुल 17 लोगों की मौत हो चुकी है। आश्चर्यजनक है कि कोरोना जैसे लक्षण होने के बावजूद ज्यादातर लोग जांच कराने से बच रहे हैं। वहीं 13 दिनों के अंदर एक ही घर के तीन सदस्यों की मौत से पूरे गांव में मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है। गांव की आबादी लगभग 4500 है। यहां के लोग बुखार, खांसी व सांस की तकलीफ से पीड़ित हैं। गांव के ही एक जूनियर हाईस्कूल की अध्यापिका सावित्री देवी के परिजनों ने बताया कि इनकों गैस की दिक्कत हुई और अटैक आ गया था जिससे उनकी मौत हो गई। वहीं 58 वर्षीय बसंती देवी पत्नी गंगा सागर की मौत आक्सीजन लेवल कम होने से हो गई। इसके पांच दिन बाद ही गंगा सागर को भी बुखार आने लगा। उनको कोविड हॉस्पिटल बीएचयू में भर्ती कराया गया जहां उनकी मृत्यु हो गई। वह रेलवे में इंजीनियर थे। वहीं बुखार आने से 40 वर्षीय तेजबहादुर की मृत्यु हो गई। इन मौतों का आंकड़ा बढ़ता ही गया, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव नहीं पहुंची। जबकि गांव के लोगों ने स्वास्थ्य विभाग को सूचना दी है।
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