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ताबूत, अलम, ताजिया और जुलजुनाह के साथ निकला चेहल्लुम की जुलूस

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सरायमीर। शहीदाने करबला के चेहल्लुम का कदीमी जुलूस गुरुवार को सुबह छह बजे चौक स्थित इमामबाड़ा तस्कीने जेनब से मजलिस के बाद निकाला गया। ताबूत, अलम, ताजिया और जुलजुनाह के साथ निकला जुलूस पुराने रास्ते से होता हुआ खारेवा स्थित सदर इमामबाड़ा पहुंचा। यहां पर क्रमवार 72 शहीदों का ताबूत बरामद हुआ। सैयद जीशान अली निजामाबाद ने जुल्म और दर्दनाक शहादत को बयान किया। मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना मासूम असगर ने कहा कि हजरत इमाम हुसैन ने 1400 साल पहले कर्बला के मैदान में जो पैगाम दिया था, वह आज हमारे मुल्क के लोगों को उसको समझने और सीखने की जरूरत है। मौलाना शौकत रिजवी ने कहा कि इमाम हुसैन इंसानियत के सबसे कीमती सरमाया का नाम है। तारीखें इंसानियत में जितनी अजीम हस्ती गुजरी है। रौजा सैयद अली आशकान में मौलाना सैयद जुल्फेकर हैदर ने कहा कि अली की बेटी जनाब ए जैनब ने यजीद के दरबार में खुतबा दिया था। वह बातिल ताकतों को आइना दिखाने के साथ साथ हुसैनी मिशन की कामयाबी और दीन ए मोहम्मदी के उसूलों की जीत का एलान है। लब्बैक या हुसैन की सदाओं से नगर गूंज उठा । जुलूस में अंजुमन गुलशन ए इस्लाम अंबेडकरनगर, अंजुमन फिरदोसिया गोपालपुर बिहार, अंजुमन गुनच्ये अब्बासिया बड़ागांव जौनपुर, अंजुमन हुसैनिया जलालपुर, अंजुमन अजादारिया हुसैनाबाद ने नोहा-मातम करके खिराजे अकीदत पेश की। जुलूस का संचालन सागर आजमी और सहर अर्शी जौनपुर ने किया। शिया कमेटी के अध्यक्ष सैयद कायम रजा और मीडिया प्रभारी सैयद मोहम्मद हुसैन ने सभी के प्रति आभार प्रकट किया।
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