आजमगढ़। किसान पाठशाला के तहत सोमवार को जनपद के कुल 207 चयनित ग्राम पंचायतों में मास्टर ट्रेनरों की ओर से फसल चक्र रबी की खेती के लिए प्रमुख प्रजातियों, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, टीकाऊ खेती इत्यादि के बारे में विस्तृत चर्चा की गई। बताया गया कि बुवाई के समय के अनुसार प्रजातियों का चयन करें। ताकि अधिकतम उत्पादन प्राप्त हो सके। गेहूं की देर से बोई जाने वाली प्रजातिया डीबीडब्लू 107, डीबीडब्लू 90, एचडी3059, एचडी 2985 और राज 4238 है। मिट्टी की जांच कराकर मृदा स्वास्थ्य कार्ड प्राप्त कर उनकी संस्तुतियों के अनुसार ही खाद एवं उर्वरकों का प्रयोग करें। टिकाऊ खेती के लिए गर्मियों में गहरी जुताई, वर्मी कम्पोस्ट, हरी खाद फसल चक्र में दलहनी फसलों का समावेस बहुफसली खेती, फसल अवषेश एवं अन्य जैविक अवषेशों का प्रबन्धन जैव उर्वरक एवं जैविक कीटनाषी का प्रयोग, मृदा स्वास्थ्य सुधारक जिप्सम, प्रेसमड, जीरोटिलेज विधि से बुवाई एवं छिड़काव विधि से उर्वरक का प्रयोग जरूरी है। वर्ष 2017-18 में विभिन्न फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य गेहूं 1735, चना 4000, मसूर 4250, राई सरसों 4000, अलसी 4100, अरहर 5450, गन्ना अगैती 325, सामान्य 315 प्रति कुन्तल हैं।