आजमगढ़। सपा के गढ़ में पैठ बनाने की मंशा से आयोजित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम में अपेक्षित भीड़ जुटने की आशंका से नेताओं की नींद उड़ी हुई है। उन्हें इस बात का डर सता रहा कि कहीं कार्यक्रम को फ्लाप साबित करने के लिए विपक्षीगण जगह-जगह सड़क जाम कर मार्गों को अवरुद्ध न कर दें। क्योंकि पूर्व में इस प्रकार का षड्यंत्र रचा जा चुका है। इसी बात को लेकर पार्टी के शीर्ष नेताओं को डर है। इसीलिए मार्ग पर यातायात सुचारु बनाए रखने के लिए पुलिस के विशेष वाहनों को लगाया गया है। साथ ही पार्टी कार्यकर्ताओं को भी चौकन्ना रहने का निर्देश दिया गया है। जिले की राजनीतिक गतिविधियों पर गौर करें तो यहां कभी सपा तो कभी बसपा का बोलबाला रहा है। भाजपा का प्रदर्शन यहां बहुत ही खराब रहा। जिले के सदर और लालगंज लोकसभा सीट पर प्राय: सपा और बसपा का कब्जा रहा। वर्ष 2008-09 के लोकसभा चुनाव में सदर सीट से जहां रमाकांत यादव ने चुनाव जीतकर भाजपा के लिए इतिहास रचा था, तो वर्ष 2014 के चुनाव में रमाकांत यह सीट हार गए। जबकि लालगंज लोकसभा से वर्ष 2014 के चुनाव में भाजपा के लिए नीलम सोनकर ने सीटकर जीतकर इतिहास रचा। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में जिले के दस सीटों में एक फूलपुर-पवई भाजपा के खेमे में गई। शेष नौ सीटों पर सपा और बसपा का कब्जा हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लहर में भी उनके पार्टी के धुरंधर बहुत कम वोटों के अंतर से चित हुए। ऐसे में भाजपा को उम्मीद है कि यदि थोड़ी सी भी मेहनत कर दी गई तो वर्ष 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव में यहां की दोनों सीटें पार्टी के पाले में आ जाएंगी। इसका प्रभाव आसपास के जिलों की सीट पर भी पड़ेगा। इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखते हुए पार्टी के लोग भीड़ जुटाने के लिए एड़ीचोटी का जोर लगाए हुए हैं। उधर बीते कुछ माह से पूर्व सांसद रमाकांत यादव को लेकर तमाम तरह की अटकलें लग रही हैं। वहीं मुलायम का गढ़ बचाना सपा की मजबूरी है। ऐसे में विपक्षी पार्टियां जहां कार्यक्रम को फ्लाप साबित करने की जुगत में हैं, तो पार्टी के लोग विपक्ष के मंसूबों को ध्वस्त करना चाह रहे। इन्ही सब बातों को ध्यान में रखते हुए जनसभा में पहुंचने वालों को किसी भी प्रकार की होने वाली परेशानियों को दूर करने का हर संभव प्रयास कर रहे।