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जांच के नाम पर वेतन रोकने का खेल, भड़के सीडीओ

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आजमगढ़। समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित विद्यालयों में वेतन रोकने और जांच करने का खेल लगातार चल रहे हैं। वर्तमान जिला समाज कल्याण अधिकारी ने एक पत्र जारी कर कहा है कि किसी भी विद्यालय का अभिलेख कार्यालय में उपलब्ध नहीं है। इस आधार पर उन्होंने इन विभागों के शिक्षकों का लगभग छह माह का आया वेतन रोक रखा है। शुक्रवार को इन शिक्षकों का प्रतिनिधिमंडल सीडीओ से मिला और उन्होंने मामले में तत्काल उच्चस्तरीय जांच के लिए जिलाधिकारी से संस्तुति की। जिला समाज कल्याण विभाग की ओर से संचालित विद्यालयों के शिक्षकों के प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को सीडीओ अनिल कुमार उपाध्याय से मिलकर आरोप लगाया कि छह माह का उनका आया वेतन विभाग ने जांच के नाम पर रोक रखा है। यह कोई पहला मौका नहीं है जब हमारी जांच कराई जा रही है। अभी फरवरी में ही जांच कराई गई थी। जब भी विभाग के पास हमें देने के लिए ग्रांट आती है, इनकी ओर से जांच शुरू कर दी जाती है। इसके कारण कई महीनों तक हमारा पैसा पड़ा रहता है। शिक्षकों ने कहा कि जिला समाज कल्याण अधिकारी द्वारा एक पत्र जारी कर कहा गया है कि विभाग के पास विद्यालयों का कोई अभिलेख नहीं है। तो हमें 25-30 वर्ष से वेतन किस आधार पर दिया गया। जांच की जाए हमें इसमें कोई एतराज नहीं है, लेकिन पहले हमारे वेतन का भुगतान किया जाए। अगर हम जांच में दोषी पाए जाते हैं तो हमसे धन की रिकवरी की जाए। प्रतिनिधि मंडल की बातों को सुनने के बाद सीडीओ ने तत्काल शिक्षकों के वेतन निस्तारण का कार्य देख रहे पटल सहायक को तलब किया। जब उसे आने में देरी हुई तो उन्होंने उक्त मामले की उच्चस्तरीय जांच करने की संस्तुति जिलाधिकारी से कर दी। प्रतिनिधिमंडल में हंसराज यादव, मधुबाला देवी आदि शामिल थे। इस बारे में सीडीओ अनिल कुमार उपाध्याय ने बताया कि प्रतिदिन मेरे पास ऐसी शिकायतें आ रही है। इससे यह स्पष्ट होता है कि विभाग में कुछ ठीक नहीं चल रहा है। मैंने समाज कल्याण विभाग के शिक्षकों की उच्चस्तरीय जांच की संस्तुति जिलाधिकारी से की है। जांच होने के बाद मामला साफ हो जाएगा। इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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