आजमगढ़। बेलईसा मंडी के लिए अधिग्रहीत भूमि के मुआवजे के मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने सरकार को उपस्थित होकर बयान दर्ज कराने के लिए नोटिस जारी कर दिया है। इतना ही नहीं न्यायालय ने यह भी मान लिया है कि अधिग्रहण में किसानों के साथ अन्याय हुआ है। सरकार को नोटिस जारी किए जाने से पीड़ित किसानों में न्याय की आस जग गई है। लगभग 30 वर्ष पूर्व 1987 में सरकार ने बेलईसा क्षेत्र के नीबी गांव के किसानों की लगभग 13.747 एकड़ भूमि मंडी की स्थापना के लिए अधिग्रहीत किया था। उस समय सरकार ने प्रति बिस्वा मात्र 1200 रुपये का मुआवजा निर्धारित किया था। काफी कम मुआवजा होने पर किसान जनपद न्यायालय की शरण में चले गये जहां से मुआवजे की धनराशि 10 गुना बढ़ा कर 12 हजार रुपये प्रति बिस्वा कर दी गई। इस पर मंडी समिति और पीड़ित किसान हाईकोर्ट चले गये। वर्षों चले मुकदमें के बाद हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की याचिकाओं को खारिज कर दिया और जनपद न्यायालय के आदेश के अनुरूप मुआवजा भुगतान की बात कही। हाईकोर्ट से रिट खारिज होने पर किसान निराश हो गये। इस बीच किसानों ने सर्वोच्च न्यायालय में न्याय के लिए गुहार लगायी। सर्वोच्च न्यायालय ने छह जुलाई को सुनवाई के दौरान यह मान लिया कि भूमि अधिग्रहण के इस मामले में किसानों के साथ अन्याय हुआ है। इसके साथ ही सरकार को नोटिस जारी कर न्यायालय में पक्ष रखने का निर्देश दिया। किसानों की पैरवी कर रहे राकेश गांधी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट से नोटिस जारी होने से किसानों में न्याय की उम्मीद जागी है।