आजमगढ़। राजकीय मेडिकल कालेज चक्रपानपुर से शासन की ओर से नर्सों का स्थानांतरण करने के बाद अब केजीएमयू लखनऊ से एक जून को जारी आदेश से जनपदवासियों में खलबली है। मेडिकल कौंसिल आफ इंडिया की रिपोर्ट के आधार पर मेडिकल कालेज के अगले स़त्र पर अस्थायी रूप से रोक लगा दी गई है। इस फैसले से जनपदवासियों की सरकार से आस टूटती जा रही है। कालेज के गौरव को बचाने के लिए गांधी गिरी टीम ने मंडलायुक्त से मिलकर ज्ञापन सौंपा। वर्तमान प्राचार्य का स्थानांतरण करने और सीबीआई जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि सबका साथ सबका विकास की बात करने वाली सरकार, सीधे इसका उल्टा कर रही हैं। अथक प्रयास से जिले को मेडिकल कालेज मिला था। अभी वह पूर्ण रूप से व्यवस्थित भी नहीं हो पाया था कि शासन ने उपकरणों और स्वास्थ्य सुविधाओं को हटाने का काम शुरू कर दिया। पहले भारी पैमाने पर नर्सों का स्थानांतरण कर दिया गया। अब मेडिकल कालेज के अगले सत्र को अस्थायी रूप से रोकने की बात की जा रही है। इस आदेश से मेडिकल कालेज के छात्र काफी स्तब्ध हैं। वर्तमान समय में मेडिकल कालेज में पांच सौ छात्र अध्ययनरत है। किन परिस्थितियों में मेडिकल कालेज को अक्षम पाया गया है, ये जांच का विषय है। प्राचार्य पर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रतिदिन 350 के आसपास ही मरीज देखे जा रहे हैं। इनके पूर्व केे प्राचार्य के कार्यकाल में प्रतिदिन हजारों की संख्या में मरीज देखे जाते थे। आशीष उपाध्याय, ऋषभ उपाध्याय, अमित सिंह, संजीत सिंह, ज्ञान प्रकाश सिंह, अकरम बेग, सौरभ पांडेय, मृम्युंजय तिवारी, संदीप गुप्ता, ज्ञानेन्द्र सिंह, आशीष राय, अभिषेक, राहुल पासवान, दिव्यांशु आदि मौजूद रहे।