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अनापति के फेर में फंसे जिले के 562 ईंट भट्ठे

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आजमगढ़। शासन ने ईंट भट्ठों के संचालन से पहले प्रदूषण विभाग से एनओसी लेना अनिवार्य कर दिया है। इसके बावजूद जनपद में ज्यादातर ईंट भट्ठे बिना एनओसी के ही धड़ल्ले से चल रहे हैं। इस मामले में अनिल कुमार की ओर से दाखिल की गई याचिका की सुनवाई के बाद एनजीटी ने जनपद के 562 ईंट भट्ठों को बंद कराने का आदेश दिया है। इस पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जिलाधिकारी को एनजीटी के आदेश का अनुपालन कराने को कहा है। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार जिले में कुल 648 ईंट भट्ठों का संचालन हो रहा है। वहीं, खनन विभाग की मानें तो जनपद में कुल 501 भट्ठे चल रहे हैं। ईंट भट्ठों के संचालन को लेकर दोनों विभाग के आंकड़े भिन्न हैं। ईंट भट्ठों के संचालन के लिए खनन विभाग और क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से प्रदूषण संबंधी अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना जरूरी होता है। इसके लिए एनजीटी ने 2010 और 2014 में आदेश जारी किया था लेकिन सिर्फ 86 ईट भट्ठा मालिकों ने ही प्रदूषण नियंत्रण कार्यालय से अनापत्ति प्रमाणपत्र लिया है। बांकी ईंट भट्ठे बिना एनओसी के ही चल रहे हैं। जिला प्रशासन की लापरवाही और भट्ठा संचालकों की मनमानी को देखते हुए अनिल कुमार ने याचिका दाखिल की थी। याचिका की सुनवाई के बाद 29 जनवरी 2019 एनजीटी ने एनओसी के बिना चल रहे 562 ईंट भट्ठों को बंद कराने का आदेश जारी किया है। इसको देखते हुए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सचिव अनिल तिवारी ने जिलाधिकारी को एनजीटी के आदेश का अनुपालन कराने का निर्देश दिया है। फिलहाल अभी तक जिला प्रशासन ने इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं की है।
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