आजमगढ़। प्रत्याशियों को अपने चुनावी खर्च दर्शाने में जीएसटी आधारित बिल लगाने पड़ेंगे। बिना जीएसटी नंबर वाले बिल को मान्यता नहीं दी जाएगी। जिस बिल पर जीएसटी नंबर नहीं होगा उसे कच्चा बिल माना जाएगा। ऐसी स्थिति में प्रत्याशी और बिल देने वाला डीलर दोनों ही परेशानी में आ सकते हैं। लोकसभा चुनाव 2019 के लिए चुनाव आयोग ने प्रत्येक प्रत्याशी को चुनावी खर्च के लिए 70 लाख रुपये की सीमा निर्धारित कर रखी है। सेवाओं और वस्तुओं की खरीद में यह रकम कहीं न कहीं खर्च होगी। ऐसे में महत्वपूर्ण यह है कि जहां रकम खर्च की गई उसका बिल विधिवत हो। हालांकि यह हिदायत प्रत्याशियों को दी जा चुकी है। प्रत्याशियों के व्यय सीमा पर नजर रखने वाली टीम इसका विशेष ध्यान रखेगी। प्रत्याशी चुनाव प्रचार के दौरान जो भी सामान खरीदने होंगे उन्हें उसकी जीएसटी चुकाकर ही सामान खरीदना होगा। इस जीएसटी बिल को लगाकर ही उन्हें व्यय लेखा टीम के समक्ष उसे प्रस्तुत करना होगा तभी यह बिल मंजूर होगी। लेकिन अगर किसी ने बिना जीएसटी का बिल लगाए अपना व्यय प्रस्तुत किया तो इसे मंजूर नहीं किया जाएगा। साथ ही प्रत्याशी और उसे बिल देने वाला डीलर दोनों परेशानी में आ सकते हैं। मुख्य कोषाधिकारी विजय शंकर ने बताया कि जो भी सामान जीएसटी के अधीन आता है प्रत्याशियों को उसकी खरीद जीएसटी चुकाकर बिल लेनी चाहिए। इस जीएसटी बिल को अपने खर्च के साथ हमारे पास जमा करना होगा। अन्यथा उनका बिल मंजूर नहीं किया जाएगा। वहीं दुकानदार द्वारा इस जीएसटी को सरकार के खाते में जमा कराना होगा।