आजमगढ़। लालगंज तहसील के रेतवां चंद्रभानपुर गांव में बंजर जमीन को लेकर दो पक्षों में हुए विवाद का पटाक्षेप हो गया। जिलाधिकारी ने उक्त मामले में एसओसी की जांच रिपोर्ट के आधार पर अपना फैसला सुनाया है। इसमें उन्होंने पाया कि एक एकड़ 51 कड़ी जमीन ग्रामसभा के बंजर खाते की भूमि है। जिस पर अभिलेखों में हेराफेरी कर कुछ लोगों ने अपना नाम दर्ज कर लिया था। जिलाधिकारी ने उक्त भूमि को वापस ग्रामसभा के बंजर खाते में दर्ज करने के साथ ही दोषी कर्मचारियों और लाभार्थियों के खिलाफ एफआईआर का आदेश दिया है। इसी बंजर जमीन के लिए 11 अरब का मुआवजा स्वीकृत हुआ था। बाद में इसे संशोधित कर 88 लाख का कर दिया गया था। लालगंज तहसील का रेतवां चंद्रभानपुर गांव उस समय चर्चा में आया जब एसएलओ दफ्तर के कर्मचारियों ने इस गांव की जमीन के एक भूभाग के लिए 10 अरब 96 करोड़ का मुआवजा तैयार किया। इतना बड़ा मुआवजा बनते ही कई दावेदार तैयार हो ए। मामला खुलने पर एसएलओ दफ्तर के कर्मचारियों ने इसमें सुधार करते हुए 88 लाख रुपये का मुआवजा तैयार किया गया। अभी इस मुआवजे को दिया जाता कि ग्रामीणों ने उक्त जमीन के बंजर और होलिका स्थल की जमीन बताते हुए शिकायत कर दी। मामला जिलाधिकारी न्यायालय में पहुंच गया। जिलाधिकारी ने उक्त मामले में अभिलेखों के जांच की जिम्मेदारी एसओसी श्रीप्रकाश राय को सौंपी। एसओसी ने एक एकड़ 51 कड़ी जमीन बंजर की निकली। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों को जिलाधिकारी ने सुना। प्रशासन की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता राजस्व ओमप्रकाश राजभर ने मजबूत तर्क और साक्ष्य प्रस्तुत किए। इस पर जब दूसरे पक्ष ने दोबारा जांच की मांग की तो जिलाधिकारी ने एसओसी को दोबारा जांच करने का निर्देश दिया। एसओसी ने उसी दिन जांच कर अपनी रिपोर्ट सौंपी। जिस पर जिलाधिकारी ने अपने फैसले में कहा कि अभिलेखों में हेराफेरी कर ग्राम सभा की बंजर जतीन पर कब्जा किया गया था। इसलिए उक्त भूमि को दोबारा ग्रामसभा के बंजर खाते में दर्ज कराते हुए अमल दरामद कराने का निर्देश एसडीएम लालगंज को दिया। साथ ही बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी को निर्देशित किया कि फर्जी प्रविष्टी कारित करने में संलिप्त कर्मचारियों को चिह्नित कर और लाभार्थियों के विरुद्घ एफआईआर दर्ज कराएं।