जानलेवा हमला किए जाने के एक मामले में अदालत ने तीन आरोपियों को दोषी पाते हुए 10-10 साल की सजा सुनाई। साथ ही प्रत्येक को 14 हजार रूपए अर्थदंड भी लगाया। मामले के एक आरोपी शंकर यादव की मुकदमा के दौरान मौत हो गई थी। दो अन्य नाबालिगों की पत्रावली को अलग कर दिया गया था। सोमवार को यह सजा अपर सत्र न्यायाधीश रामानंद की अदालत ने सुनाई। 16 दिसंबर 2006 को शहर कोतवाली में सफुद्दीनपुर गांव निवासी अनिल कुमार सिंह ने गांव के आरोपियों के विरूद्ध मुकदमा दर्ज कराया था। उन्होंने कहा था कि घटना के दिन लगभग 11 बजे वह भाई प्रमोद व पिता जगदीश के साथ ट्यूबवेल की नाली साफ करा रहे थे। तभी पुरानी रंजिश को लेकर नगीना, शंकर पु्त्रगण सरफराज यादव, गोरख, नंदू पुत्रगण शंकर व दो नाबालिग के साथ लाठी बल्लम लेकर आए और हमला कर दिया। हमले में भाई प्रमोद व पिता जगदीश घायल हो गए। मुकदमें के परीक्षण के दौरान अभियोजन पक्ष की तरफ से पैरवी कर रहे शासकीय अधिवक्ता श्रीश कुमार चौहान ने सात गवाहों को पेश कर तर्को को रखा। अदालत ने उभय पक्ष के तर्को को सुनने के बाद नगीना यादव, गोरख यादव व नंदू यादव को जानलेवा हमले का दोषी पाया और उक्त सजा तय की।