अयोध्या। कोतवाली क्षेत्र अयोध्या के खाले का पुरवा में बुधवार देर रात करीब एक बजे मामूली विवाद में बड़े भाई ने छोटे भाई की गला रेतकर हत्या कर दी। देर रात करीब दो बजे श्रीराम अस्पताल में उसे मृत घोषित कर दिया गया। पिता की तहरीर पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करके उसे गिरफ्तार कर लिया है।
मूलरूप से जौनपुर के खेतासराय क्षेत्र के टिकरी कला निवासी सुरेश सिंह करीब तीन साल पहले उत्तर प्रदेश पुलिस से उप निरीक्षक पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। उन्होंने रायगंज चौकी क्षेत्र के खाले का पुरवा में मकान बनवाया है, जहां अपने बेटों आदर्श प्रताप सिंह (25), रणविजय सिंह उर्फ अभिषेक (28) और पत्नी के साथ रहते हैं। बेटी की उन्होंने कुछ समय पहले शादी कर दी है।
बुधवार को वह पैतृक गांव गए थे। घर पर उनकी पत्नी और बेटे मौजूद थे। पुलिस के अनुसार, देर रात करीब 12 बजे खाना खाते समय दोनों बेटे किसी बात को लेकर आपस में विवाद करने लगे। विवाद इतना बढ़ गया कि अभिषेक के सिर पर खून सवार हो गया। उसने घर में रखे सब्जी काटने वाले चाकू से आदर्श का गला रेत दिया। घर में गिरकर वह छटपटाने लगा तो अभिषेक ने स्वयं उसे श्रीराम अस्पताल पहुंचाया। वहां इलाज के दौरान डॉक्टरों ने आदर्श को मृत घोषित कर दिया।
कोतवाल पंकज सिंह ने बताया कि मृतक के पिता सुरेश सिंह को रात में ही सूचना दी गई थी, जो कि सुबह तक अयोध्या पहुंचे। उनकी तहरीर पर आरोपी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करके उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। फॉरेंसिक टीम ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया है। परिजन व स्थानीय लोगों से पूछताछ और मामले की जांच की जा रही है।
गांव में पसरा मातम, घटना से हर कोई हतप्रभ
सगे भाई की हत्या के बाद पूरे गांव में मातमी सन्नाटा पसरा है। ग्रामीणों की जुबान पर घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। मृतक के घर के बाहर भी आसपास की महिलाएं जमा हैं। ग्रामीणों ने बताया कि दोनों भाइयों में अक्सर किसी बात को लेकर विवाद रहता था, लेकिन इसे सामान्य समझा जाता था। ऐसी घटना की कोई कल्पना नहीं थी।
इनसेट
स्नातक करके बेरोजगार थे दोनों भाई
सूत्रों के अनुसार दोनों भाई स्नातक उत्तीर्ण थे। उनके पिता सुरेश सिंह लंबे समय तक जिले में ही उत्तर प्रदेश पुलिस में तैनात रहे। वह रामजन्मभूमि परिसर में लंबे समय तक सुरक्षा ड्यूटी करते रहे। अपनी नौकरी के दौरान ही उन्होंने अयोध्या में रहने का मन बनाया और खाले का पुरवा में जमीन खरीदकर मकान बनवाया। सेवानिवृत्ति के बाद वह यहीं पर रह गए। करीब तीन साल से वह अपने मकान में शिफ्ट हो गए थे।