अयोध्या। सरकारी अस्पतालों में दलाली पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। शायद यही वजह है कि जिला महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड व खून जांच कराने के बाद प्रसूताएं नर्सिंग होम पहुंच रही हैं। वहां अनाड़ियों की गिरफ्त में आकर उनकी जान पर बन आ रही है। मंगलवार को सीएमओ की छापेमारी के दौरान साकेत हॉस्पिटल में इसका नमूना सामने आया है।
सीएमओ डॉ. सुशील कुमार बानियान ने मंगलवार देर शाम शहर के तीन नर्सिंग होम पर छापा मारा था। तीनों जगहों पर 11 महिलाओं का सिजेरियन प्रसव हुआ था, लेकिन ऑपरेशन करने वाले चिकित्सक का अता-पता नहीं था। आशंका जताई गई कि अकुशल व अयोग्य चिकित्सकों ने यह ऑपरेशन किए हैं। इनमें नाका चुंगी स्थित साकेत हॉस्पिटल में दो गर्भवती महिलाएं भर्ती मिलीं।
एक की पहचान डाभासेमर के चांदपुर हरवंश निवासी अंजली व दूसरे की शहर के बेगमगंज गढ़ैया निवासी प्रीति यादव के रूप में हुई। इनमें अंजली का सिजेरियन हो चुका था और प्रीति के प्रसव की तैयारी चल रही थी। कागजातों के अनुसार प्रीति सोमवार को ही जिला महिला अस्पताल गई थीं। वहां उनकी अल्ट्रासाउंड और खून जांच हुई। वहां कई योग्य चिकित्सक होने के बावजूद वह सिजेरियन के लिए नर्सिंग होम पहुंच गईं।
वहीं, 12 जुलाई को अंजली का भी महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड हुआ था। इससे आशंका जताई गई कि दोनों महिलाएं पहले महिला अस्पताल ही गई होंगी। वहां जमा दलालों के चंगुल में फंसकर वह नर्सिंग होम की शरण में पहुंचीं होंगी। इससे व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
गर्भधारण के बाद से नौ माह तक प्रसूता का इलाज विभिन्न अस्पतालों के विशेषज्ञ चिकित्सक करते हैं, लेकिन प्रसव के समय दलाल उन्हें बरगलाकर नर्सिंग होम में ले जाते हैं। वहां उनकी मुलाकात किसी अनाड़ी चिकित्सक से होती है, जिसे गर्भावस्था के बाद से लेकर प्रसव तक किसी जोखिमों की जानकारी नहीं होती है। कई बार मरीज जान भी गवां देते हैं।