फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

धरती के साथ खिलवाड़ बंद करना होगा : शिवराज सिंह चौहान

Thu, 25 Jun 2026 09:16 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
विज्ञापन
किसानों के साथ धान रोपाई करते केंद्रीय कृ​षि मंत्री व प्रदेश के कृ​षि मंत्री।
विज्ञापन
कुमारगंज। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बृहस्पतिवार को आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय का दौरा किया। उन्होंने स्वस्थ मिट्टी सशक्त किसान, समृद्ध भारत विषयक संगोष्ठी में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने किसानों से प्राकृतिक खेती अपनाने और रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग कम करने का आह्वान किया।
विज्ञापन

चौहान ने कहा कि धरती के साथ खिलवाड़ बंद करना होगा। चेतावनी दी कि रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग जारी रहने पर धरती बंजर हो जाएगी। यह अन्न उगाना बंद कर देगी। उन्होंने बताया कि रासायनिक दवाओं से केंचुए मर गए हैं, जो मिट्टी को उपजाऊ बनाते हैं। चौहान ने एकीकृत खेती के महत्व पर जोर दिया। यह भी कहा कि उर्वरकों के प्रयोग से पैदा होने वाले फल और सब्जियां भी बीमार हैं। केंद्रीय मंत्री ने कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह को प्रोत्साहित किया। कहा कि खेत बचाओ अभियान के बाद उनका अगला लक्ष्य मिट्टी परीक्षण है। आईसीएआर नई दिल्ली ने उत्तर प्रदेश के लिए एक कार्ययोजना तैयार की है, जो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपी गई है। इस कार्ययोजना का उद्देश्य कृषि में वैज्ञानिक खेती, बढ़ते तापमान, सूखा और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों से निपटना है।
कार्यक्रम में पहुंचने पर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान का स्वागत हुआ। प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, कृषि राज्य मंत्री बलदेव सिंह औलख, गो सेवा आयोग के अध्यक्ष आचार्य श्याम बिहारी गुप्ता, आईसीएआर नई दिल्ली के महानिदेशक एमएल जाट और प्रमुख सचिव कृषि रवींद्र कुमार भी कार्यक्रम में शामिल हुए। कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने अतिथियों का स्वागत स्मृति चिह्न और अंगवस्त्रम भेंटकर किया।
विज्ञापन

केंद्रीय कृषि मंत्री ने किसानों को दिए आय बढ़ाने के टिप्स

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसान चौपाल में आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक पद्धतियों से आय बढ़ाने के टिप्स दिए। इस कार्यक्रम में सात जिलों से 500 से अधिक किसानों ने भाग लिया। केंद्रीय मंत्री ने डेयरी प्रक्षेत्र का दौरा किया और गायों को गुड़ व चारा खिलाया। उन्होंने गोपालकों से बात की और उनकी समस्याओं को सुना। इसके बाद उन्होंने प्राकृतिक खेती परिसर में मछलियों को दाना खिलाया और हल्दी की खेती का निरीक्षण किया। उन्होंने मृदा संरक्षण के लिए प्राकृतिक खेती पर बल दिया। विश्वविद्यालय परिसर में उन्होंने धान की रोपाई भी की।

जिलों को दिया गया 60 हजार क्विंटल ढैंचे का बीज : सूर्यप्रताप शाही
कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने किसानों की आत्मनिर्भरता और विकसित कृषि पर जोर दिया है। बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने 60 हजार क्विंटल ढैंचे का बीज हर जिले में भेजा है। प्रदेश सरकार किसानों को सात लाख मिनी किट मुफ्त दे रही है।कृषि मंत्री शाही ने धान की सीधी रोपाई तकनीक अपनाने का सुझाव दिया। इस तकनीक से उर्वरक की मात्रा घटती है और पैदावार बढ़ती है। उन्होंने कहा कि किसानों को खेती का विविधीकरण, उत्पादन बढ़ाना और दलहन-तिलहन की खेती करनी होगी। सर्टिफाइड बीज की लागत सरकार ने आधी कर दी है, जिससे किसान आत्मनिर्भर बन सकेंगे। मंत्री शाही ने कहा कि आत्मनिर्भरता से विदेशों से उर्वरक, सेब और दाल मंगाने की परेशानी से मुक्ति मिलेगी।
अलनीनो से किसानों को जागरूक करने पर जोर
आईसीएआर नई दिल्ली के महानिदेशक एमएल जाट ने बताया कि उत्तर प्रदेश का 2047 का कृषि सड़क मैप मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुत किया गया। उन्होंने कृषि मंत्री शाही को विश्वविद्यालय को सक्षम कुलपति देने के लिए बधाई दी। जाट ने अलनीनो से किसानों को जागरूक करने और धरती को रसायनों से बचाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि छोटे कदम और सही खेती से किसान आत्मनिर्भर बन सकते हैं। धरती का स्वास्थ्य सही रखने से अधिक दवा नहीं देनी पड़ेगी।

कृषि क्षेत्र में देशभर में अव्वल होगा उत्तर प्रदेश- कुलपति
कृषि विवि के कुलपति डा. ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि अमृत काल में भारत अपनी स्वतंत्रता के सौ वर्ष पूरा करेगा तो उत्तर प्रदेश की कृषि व्यवस्था देश में अग्रणी रहेगी। वर्तमान समय में किसान जितने फायदे की उम्मीद कर रहे हैं उतना लाभ नहीं मिल पा रहा है क्योंकि बीजों और कीटनाशकों एवं खाद पदार्थों में लागत बहुत अधिक है। कुलपति ने कहा कि किसानों के लागत को घटाना होगा और उत्पादन बढ़ाकर लाभ बढ़ाने पर कार्य करना होगा तब युवाओं का झुकाव खेती की तरफ बढ़ेगा। कहा कि इंटीग्रेटेड फार्मिंग सिस्टम का मॉड्यूल भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद को दिया गया है जिसमें एक तालाब होगा जिसमें मछली होगी, मुर्गी पालन, बत्तख, कुक्कुट और गाय होगी। गाय के गोबर से प्राकृतिक खेती होगी। ऐसी व्यवस्था किसानों को देनी होगी जिससे किसानों को अधिक से अधिक लाभ मिल सके। यह युवाओं के लिए कृषि रोजगार का अच्छा जरिया होगा और उत्तर प्रदेश राष्ट्र में प्रथम स्थान पर होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें