अयोध्या। वैशाख कृष्ण द्वितीया और विक्रम संवत 2082 के पावन दिन प्रभु श्रीराम की नगरी एक बार फिर इतिहास के एक और स्वर्णिम अध्याय की साक्षी बनी। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर परिसर में विशेष आयोजन के तहत संत शिरोमणि गोस्वामी तुलसी दास की मूर्ति का पूजन कर लोकार्पण किया गया। इसी के साथ श्रद्धालुओं को उनके दर्शन मिलने लगे।
यह मूर्ति यात्री सुविधा केंद्र के पूर्व दिशा में प्रवेश द्वार प्रांगण में स्थापित की गई है। समारोह का वातावरण भक्तिमय और भावविभोर कर देने वाला रहा। मंत्रोच्चार, वैदिक परंपराओं और संत-समुदाय की मौजूदगी में जब संत तुलसी दास की मूर्ति का अभिषेक व पूजन हुआ, तो श्रद्धालुओं की आंखें श्रद्धा से नम थीं। यह मूर्ति न केवल संत तुलसी दास के महान आध्यात्मिक योगदान को स्मरण कराती है, बल्कि यह समर्पण, भक्ति और धर्म के पुनः जागरण का प्रतीक बनकर खड़ी है। मूर्ति साढ़े तीन फीट ऊंची है और सफेद संगमरमर के पत्थर पर बनी है।
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया कि अब जो भी भक्तजन श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के दर्शन के लिए आएंगे, उन्हें संत तुलसी दास की मूर्ति के दर्शन का भी सौभाग्य मिलेगा। यह मूर्ति मंदिर के प्रवेश प्रांगण में स्थित है, जिससे हर श्रद्धालु की नजर इस पर पड़ेगी और उनके हृदय में श्रीरामचरित मानस के रचयिता के प्रति श्रद्धा का भाव स्वतः जाग उठेगा।
उन्होंने कहा कि संत तुलसी दास का जीवन संपूर्ण मानवता के लिए एक आदर्श है। उन्होंने श्रीरामचरित मानस के माध्यम से श्रीरामकथा को घर-घर तक पहुंचाया और हिंदी भाषा में भक्ति साहित्य की एक अमिट धारा प्रवाहित की। अयोध्या में उनकी प्रतिमा की स्थापना, उनके योगदान को नमन करने का एक पावन प्रयास है। इस परिसर में संत तुलसी दास की मूर्ति की स्थापना न केवल हमारी सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देने का प्रयास है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए यह प्रेरणा का स्थायी स्रोत बन जाएगी।
लोकार्पण के अवसर पर हनुमान चालीसा का पाठ किया गया। पूजन-अर्चन के बाद प्रतिमा का लोकार्पण किया गया। पूरे आयोजन के दौरान भावनाओं का ज्वार उमड़ पड़ा। हर कोई इस ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनने को गर्व का विषय मान रहा था। इस दौरान मंदिर भवन निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र, राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र, महंत दिनेंद्र दास व डॉ. चंद्र गोपाल पांडेय सहित अन्य अतिथि मौजूद रहे।